Income Tax Return Filing: अभी भी फाइल कर सकते हैं FY24 के लिए ITR, लेकिन नहीं चुन सकते पुरानी टैक्स व्यवस्था

ITR Filing: इस वक्त देश में इनकम टैक्स की दो तरह की व्यवस्था हैं। नई टैक्स व्यवस्था में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट हर आयु के व्यक्ति के लिए 3 लाख रुपये है। वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट 60 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए 2.5 लाख रुपये, 60-80 वर्ष के लिए 3 लाख रुपये और 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए 5 लाख रुपये है

अपडेटेड Aug 03, 2024 पर 1:41 PM
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बिलेटेड ITR फाइल करने वाले पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत उपलब्ध उन डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस को क्लेम नहीं कर सकेंगे, जिनकी इजाजत नई टैक्स व्यवस्था के साथ नहीं है।

Income Tax Return Filing: वित्त वर्ष 2023-24 (आकलन वर्ष 2024-25) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2024 गुजर चुकी है। लेकिन ऐसा नहीं है कि डेडलाइन गुजरने के बाद वित्त वर्ष 2023-24 का रिटर्न फाइल नहीं होगा। इसे अभी भी फाइल किया जा सकता है लेकिन यह बिलेटेड ITR होगा, जिसके साथ 5000 रुपये तक पेनल्टी का भुगतान करना होगा। साथ ही ब्याज भी भरना पड़ सकता है। बिलेटेड ITR फाइल करने के लिए आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2024 है।

आयकर कानून के सेक्शन 234F के तहत 5 लाख रुपये तक ग्रॉस टोटल इनकम वालों को बिलेटेड ITR के लिए 1000 रुपये और 5 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वालों को 5000 रुपये पेनल्टी भरनी होगी। सेक्शन 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज लग सकता है। याद रहे कि बिलेटेड रिटर्न, रिवाइज नहीं किया जा सकता है।

केवल नई टैक्स व्यवस्था के तहत ही फाइल होगा बिलेटेड ITR


यह भी याद रहे कि 1 अगस्त 2024 से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बिलेटेड ITR फाइल करते वक्त टैक्सपेयर्स पुरानी टैक्स व्यवस्था का चुनाव नहीं कर सकते हैं। यह केवल नई टैक्स व्यवस्था के तहत ही फाइल किया जा सकेगा। इसकी वजह है कि मौजूदा आयकर कानूनों के तहत अब नई आयकर व्यवस्था ही डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था बन चुकी है। डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था का मतलब है कि अगर कोई टैक्सपेयर किसी वित्त वर्ष में पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से चुनाव नहीं करता है तो ऑटोमेटिकली यह मान लिया जाएगा कि उसने नई टैक्स व्यवस्था को चुना है।

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बिलेटेड ITR फाइल करने वाले पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत उपलब्ध उन डिडक्शंस और एग्जेंप्शंस को क्लेम नहीं कर सकेंगे, जिनकी इजाजत नई टैक्स व्यवस्था के साथ नहीं है। इसके अलावा बिलेटेड ITR का एक और नुकसान यह भी है कि अगर टैक्सपेयर को कारोबार संबंधी और कैपिटल लॉस जैसे नुकसान हुए हैं, तो उन्हें कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जा सकता है और न ही बाद के वर्षों में समायोजित किया जा सकता है। हालांकि, घर की संपत्ति से होने वाला नुकसान एक अपवाद है और इसे कैरिी फॉरवर्ड किया जा सकता है, भले ही रिटर्न देर से दाखिल किया जा रहा हो।

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बिलेटेड ITR होने पर भी किन टैक्सपेयर्स को पेनल्टी से छूट

टैक्सपेयर्स की एक कैटेगरी ऐसी भी है, जिसके पास डेडलाइन के गुजरने के बाद भी बिना किसी पेनल्टी या लेट फीस के ITR फाइल करने का मौका रहता है। ये वे लोग हैं जो जीरो रिटर्न फाइल कर रहे हैं, यानि कि ​जिनकी कुल आय, उनके द्वारा चुनी गई टैक्स व्यवस्था के तहत, बिना किसी डिडक्शन को क्लेम किए बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट के अंदर आती है।

इस वक्त देश में इनकम टैक्स की दो तरह की व्यवस्था हैं। नई टैक्स व्यवस्था में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट हर आयु के व्यक्ति के लिए 3 लाख रुपये है। वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट 60 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए 2.5 लाख रुपये, 60-80 वर्ष के लिए 3 लाख रुपये और 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए 5 लाख रुपये है। बिलेटेड ITR में पेनल्टी से छूट के लिए कुछ कंडीशंस लागू रहती हैं। इन कंडीशंस के साथ वाला टैक्सपेयर अगर ITR भरने की डेडलाइन से चूका तो फिर उसे भी अन्य टैक्सपेयर्स की तरह बिलेटेड ITR पर पेनल्टी का भुगतान करना होता है। ये कंडीशंस हैं...

  • किसी बैंक/सहकारी बैंक में एक या एक से ज्यादा खातों में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की रकम जमा की हो
  • किसी साल में 1 लाख रुपये या उससे अधिक के बिजली बिल का भुगतान किया हो
  • अपनी या किसी और की विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च किए हों
  • किसी गैर भारतीय कंपनी में स्टॉक्स जैसे विदेशी एसेट्स का मालिकाना हक रखते हों

अगर दिसंबर की डेडलाइन भी चूक गए तो क्या होगा

अगर टैक्सपेयर, दिसंबर की डेडलाइन तक भी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बिलेटेड ITR दाखिल नहीं करता है तो वह कुछ विशिष्ट मामलों में ITR-U यानि अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है। इसमें पेनल्टी और ब्याज के साथ टैक्स ड्यू अमाउंट पर 25-50% एडिशनल टैक्स देना होगा। नई आयकर व्यवस्था के तहत अपडेटेड ITR दाखिल करने से बिलेटेड ITR दाखिल करने की तुलना में अधिक टैक्स भरना पड़ सकता है।

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आयकर कानून के तहत अगर टैक्सपेयर की कर देनदारी 25,000 रुपये से ज्यादा है, तो उसे कम से कम छह महीने और अधिकतम 7 साल तक के सश्रम कारावास की सजा हो सकती है। साथ ही जुर्माना भी देना पड़ सकता है। 25,000 रुपये से कम कर देनदारियों के लिए, सजा में कम से कम 3 महीने और अधिकतम 2 साल तक का सश्रम कारावास और जुर्माना शामिल है।

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