Get App

क्या आप जानते हैं गोल्ड बेचने पर आपको कितना टैक्स देना होगा?

गोल्ड प्राइस में तेजी का फायदा उठाकर आप मुनाफा कमाना चाहते हैं तो पहले टैक्स का हिसाब किताब समझ लीजिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 03, 2019 पर 8:54 AM
क्या आप जानते हैं गोल्ड बेचने पर आपको कितना टैक्स देना होगा?

गोल्ड प्राइस की कीमतें 26 अगस्त को 40,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर पहुंच गए हैं। पिछले एक साल से लगातार गोल्ड प्राइस बढ़ रहा है। भारत में गोल्ड निवेश का सबसे आसान रास्ता माना जाता है। यहां हर घर में गोल्ड होता है। लेकिन इस बात की जानकारी किसी को नहीं है कि गोल्ड पर टैक्स कितना लगता है?

फिजिकल गोल्ड

अगर आप गोल्ड बार, सोने के सिक्के या गहने खरीदते हैं और तीन साल से पहले मुनाफा बनाकर बेच देते हैं तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। अगर आप तीन साल के बाद प्रॉफिट लेकर बेचते हैं तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाता है और आपके अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगता है। वहीं LTGC पर इंडेक्सेशन बेनेफिट के साथ 20.8 फीसदी टैक्स (सेस सहित) लगता है।

अगर आप गोल्ड बेचकर उससे कोई रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो इनकम टैक्स के सेक्शन 54F के तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स छूट का फायदा भी ले सकते हैं। आप जितनी रकम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने पर खर्च करेंगे, टैक्स छूट उतनी मिलेगी। ऐसे में आप सिर्फ मुनाफा नहीं बल्कि पूरी रकम घर में लगाकर टैक्स छूट ले सकते हैं।

गोल्ड म्यूचुअल फंड और ETF

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) फिजिकल गोल्ड में और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स गोल्ड ETF में निवेश करते हैं। दोनों की चाल फिजिकल गोल्ड के भाव में उतारचढ़ाव से तय होती है। इसमें टैक्स फिजिकल गोल्ड की तरह ही शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म के हिसाब से लगता है। साथ ही टैक्स छूट भी उसी हिसाब से मिलता है।

गोल्ड बॉन्ड्स

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स निश्चित तौर पर फिजिकल गोल्ड या गोल्ड ETF और म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले बेहतर है। ये बॉन्ड समय समय पर भारत सरकार की तरफ से RBI जारी करता है। गोल्ड की वैल्यू बढ़ने के साथ ही RBI इस पर हर साल 2.5 फीसदी इंटरेस्ट भी देता है। कुल मिलाकर अगर आप मेच्योरिटी तक गोल्ड बॉन्ड के निवेश में बने रहते हैं तो आपको टैक्स से छूट मिलती है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 8 साल के बाद मेच्योर होते हैं। हालांकि इसमें एग्जिट पांचवें साल के बाद शुरू हो जाता है। आप चाहे तो स्टॉक एक्सचेंज पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में ट्रेड करके 15 दिन में भी बाहर निकल सकते हैं। अगर आप मेच्योरिटी से पहले इससे बाहर निकलते हैं तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स कैलकुलेशन में इंडेक्सेशन का फायदा मिलेगा। हालांकि इसके इंटरेस्ट पर आपको अपने स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा।

सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें