मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्राइब्यूनल के आदेश पर इंश्योरेंस कंपनी मुआवजा देती है तो उसके इंटरेस्ट पर अब टीडीएस नहीं लगेगा। यूनियन बजट 2026 में इसका ऐलान हुआ है। पहले इसे सेक्शन 194ए के तहत 'दूसरे स्रोतों से इनकम' माना जाता था।
मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्राइब्यूनल के आदेश पर इंश्योरेंस कंपनी मुआवजा देती है तो उसके इंटरेस्ट पर अब टीडीएस नहीं लगेगा। यूनियन बजट 2026 में इसका ऐलान हुआ है। पहले इसे सेक्शन 194ए के तहत 'दूसरे स्रोतों से इनकम' माना जाता था।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में कहा, "मैं यह प्रस्ताव पेश करती हूं कि मोटर एक्सिडें क्लेम्स ट्राइब्यूनल की तरफ से इंटरेस्ट चुकाने के आदेश पर अब नेचुरल पर्सन को इनकम टैक्स से छूट मिलेगी। इस अकाउंट पर कोई टीडीएस नहीं चुकाना होगा।"
सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त किया है, जब देश में सड़क हादसों को लेकर चिंता बढ़ी है। सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले छह महीनों में नेशनल हाईवेज पर हुए हादसों में 26,770 लोगों की मौत हो गई।
मोटर एक्सिडेंट क्लेम्स ट्राइब्यूनल्स (MACTs) अर्द्ध-न्यायिक बॉडीज हैं। इन्हें मोटरल व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत बनाया गया है। हर जिले में एसेसीटी है, जिसका मकसद मोटर एक्सिडेंट से हुए नुकसान के मामलों में कंपनसेशन देना है। नुकसान में मौतें और प्रॉपटी को हुआ नुकसान दोनों शामिल हैं।
पहले एमएसीटी की तरफ से दिए गए कंपनसेशन के आदेश के तहत क्लेम अमाउंट 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर टीडीएस लागू होता था। किंग स्टब एंड कासिवा, एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य ने कहा, "एमएसीटी इंटरेस्ट पर टैक्स के नियमों से उलझन की स्थिति पैदा होती थी। अथॉरिटीज इसे 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' मानते थे, जबकि यह एक तरह से मुआवजा था।"
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उन्होंने कहा कि अगर हादसे का शिकार व्यक्ति उस पर निर्भर लोगों के टैक्सपेयर्स नहीं होने पर ज्यादा दिक्कत होती थी। सरकार के 1 फरवरी के ऐलान के लागू होने पर इंश्योरर और इंश्योर्ड के बीच क्लेम का सेटलमेंट जल्द होगा। पहले टीडीएस से जुड़े प्रोसिजर की वजह से इसमें देर होती थी।
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