सोने को लेकर लोगों की सोच थोड़ी अलग होती है। ज्यादातर लोग इसे ऐसी चीज मानते हैं जिसे खरीदकर हमेशा के लिए रख लिया जाए। यह लॉकर में, डीमैट अकाउंट में या गोल्ड बॉन्ड में पड़ा रहता है और चुपचाप अपनी वैल्यू बनाए रखता है।

सोने को लेकर लोगों की सोच थोड़ी अलग होती है। ज्यादातर लोग इसे ऐसी चीज मानते हैं जिसे खरीदकर हमेशा के लिए रख लिया जाए। यह लॉकर में, डीमैट अकाउंट में या गोल्ड बॉन्ड में पड़ा रहता है और चुपचाप अपनी वैल्यू बनाए रखता है।
लेकिन सच यह है कि सोना हमेशा के लिए पकड़कर रखने वाली चीज नहीं है। यह कोई बिजनेस नहीं है जिसकी कमाई बढ़ती रहे और न ही यह आपको नियमित आय देता है। इसकी कीमतें ज्यादातर भावनाओं, डर, महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के साथ ऊपर नीचे होती हैं।
इसका मतलब है कि ऐसे मौके भी आते हैं, जब सोना बेचना समझदारी हो सकती है। आइए जानते हैं कि आपको कब सोना बेचने के बारे में सोचना चाहिए।
1. जब सोना पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा हो जाए
यह सबसे आम स्थिति होती है। सोने की कीमतें बढ़ती हैं और अचानक जो निवेश आपके पोर्टफोलियो का 10 प्रतिशत था, वह 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो जाता है। ऐसी स्थिति में आप सोने को सिर्फ सुरक्षा के तौर पर नहीं रख रहे होते, बल्कि उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो जाते हैं।
ऐसे समय पर थोड़ा मुनाफा निकालना समझदारी हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि पूरा सोना बेच दें, बल्कि कुछ हिस्सा बेचकर पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित कर लें।
2. जब कीमत बहुत तेजी से बढ़ने लगे
सोना अक्सर तब तेजी से बढ़ता है जब बाजार में घबराहट हो, युद्ध का खतरा हो, महंगाई बढ़ रही हो या मुद्रा को लेकर चिंता हो। अगर कीमतें कम समय में तेजी से ऊपर जा रही हों, तो कई बार यह तेजी भावनाओं के कारण होती है। इसके पीछे कोई मजबूत बुनियादी कारण नहीं होता।
ऐसे समय पर थोड़ा मुनाफा लेना एक अच्छा मौका हो सकता है। आपको बिल्कुल सबसे ऊंचे स्तर पर बेचने की जरूरत नहीं है। मजबूती के समय थोड़ा थोड़ा बेच लेना अक्सर बेहतर रणनीति होती है।
3. जब आपको सच में पैसों की जरूरत हो
यह बात सुनने में सीधी लगती है, लेकिन लोग यहीं सबसे ज्यादा हिचकते हैं। कई बार हम किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रहे होते हैं। जैसे कि घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट, बच्चे की पढ़ाई या कोई बड़ा खर्च। इस बीच सोने ने अच्छा रिटर्न दिया है, तो यही वह समय है जब उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
'थोड़ा और बढ़ने' के इंतजार में कई बार लोग सही मौका खो देते हैं। सोने का असली काम यही है कि जरूरत पड़ने पर वह काम आए।
4. जब दूसरे निवेश विकल्प ज्यादा बेहतर लगें
कभी कभी फैसला सोने की वजह से नहीं, बल्कि दूसरे निवेश विकल्पों की वजह से होता है। अगर शेयर बाजार में गिरावट आ गई है और अच्छे स्टॉक सस्ते मिल रहे हैं, या फिक्स्ड इनकम में ज्यादा ब्याज मिलने लगा है, तो कुछ पैसा सोने से निकालकर वहां लगाया जा सकता है।
सोना आम तौर पर पोर्टफोलियो को स्थिर रखने का काम करता है। लंबी अवधि की तेज ग्रोथ अक्सर दूसरे एसेट्स से आती है।
5. जब आर्थिक माहौल बदलने लगे
सोना खास परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करता है, जैसे ज्यादा महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता या कमजोर मुद्रा। अगर ये हालात स्थिर होने लगें और ब्याज दरें बढ़ने लगें, तो सोने की तेजी अक्सर धीमी पड़ जाती है।
इसका मतलब यह नहीं कि आपको पूरा सोना बेच देना चाहिए, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि अपने निवेश की फिर से समीक्षा की जाए।
सोना किस रूप में रखना चाहिए
सोना किस रूप में रखा गया है, यह भी बहुत मायने रखता है। ज्वेलरी बेचने पर अक्सर कटौती होती है। गोल्ड ETF को बेचना अमूमन आसान होता है। वहीं Sovereign Gold Bonds को आम तौर पर मैच्योरिटी तक रखना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें टैक्स का फायदा मिलता है।
इसलिए फैसला केवल यह नहीं होता कि सोना कब बेचना है, बल्कि यह भी होता है कि किस रूप में बेचना है।
सोने में निवेश अच्छा है, पर...
सोना काफी उपयोगी निवेश है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तब यह सुरक्षा देता है।
लेकिन इसे बिना सोचे समझे हमेशा के लिए पकड़कर रखना जरूरी नहीं है। इसे एक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। वे जरूरत के अनुसार अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करते हैं और जब इसका काम पूरा हो जाता है, तो इसे बेचने से भी नहीं हिचकते।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
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