Get App

Insurance Form Deatils: इंश्योरेंस फॉर्म भरते वक्त सच बोलना क्यों है जरूरी? छोटी चूक से हो सकता है ये बड़ा नुकसान

Insurance Form Deatils: इंश्योरेंस फॉर्म भरते समय सच बताना बेहद जरूरी है, वरना क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। सही जानकारी देने से आपका प्रीमियम थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन भविष्य में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित रहती है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 08, 2026 पर 4:19 PM
Insurance Form Deatils: इंश्योरेंस फॉर्म भरते वक्त सच बोलना क्यों है जरूरी? छोटी चूक से हो सकता है ये बड़ा नुकसान

इंश्योरेंस खरीदना अक्सर लोगों के लिए औपचारिकता जैसा लगता है। लंबा फॉर्म, कई सवाल और यह सोच कि ‘थोड़ा बहुत छुपा लेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा’। लेकिन सच्चाई यह है कि इंश्योरेंस फॉर्म में गलत या अधूरी जानकारी देना भविष्य में भारी मुसीबत का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब आप पॉलिसी लेते हैं, तो कंपनी आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जोखिम का आकलन करती है। अगर आपने अपनी मेडिकल हिस्ट्री, धूम्रपान की आदत या किसी गंभीर बीमारी को छुपाया, तो क्लेम के समय कंपनी इसे धोखाधड़ी मान सकती है। नतीजा क्लेम रिजेक्ट या लंबी देरी। वहीं अगर आप शुरुआत में ही सच बता दें, तो कंपनी पॉलिसी में कुछ बदलाव कर सकती है, जैसे प्रीमियम थोड़ा बढ़ाना या कुछ शर्तें जोड़ना। लेकिन इससे आपका क्लेम सुरक्षित रहता है और मानसिक शांति भी मिलती है।

IRDAI नियमों के तहत फ्रॉड साबित होने पर क्लेम रिजेक्ट, पॉलिसी कैंसल, प्रीमियम रिफंड तक नहीं मिलता है। 3 साल जेल के लिए कानूनी सजा भी हो सकती है या 10 लाख जुर्माना देना पड़ सकता है। छोटी झूठ भी धारा 420 (चोरी) या फॉर्जरी के दायरे में आ सकती है। अस्पताल ब्लैकलिस्ट हो सकते हैं।

मान लीजिए, राजेश नाम का व्यक्ति हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय अपनी डायबिटीज की जानकारी छुपा लेता है। कुछ साल बाद जब उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और क्लेम किया, तो इंश्योरेंस कंपनी ने मेडिकल रिकॉर्ड देखकर पाया कि उसने फॉर्म में गलत जानकारी दी थी। परिणामस्वरूप उसका क्लेम रिजेक्ट हो गया। अगर राजेश ने शुरुआत में ही सच बताया होता, तो शायद उसे थोड़ा ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता, लेकिन इलाज का पूरा खर्च कंपनी उठाती।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें