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Adhik Maas Ke Niyam: अधिक मास में करें इन चीजों से परहेज, जानें इस माह में क्या खाएं और क्या नहीं

Adhik Maas Ke Niyam: ज्येष्ठ अधिक मास शुरू हो चुका है। हिंदू धर्म में इस माह को धार्मिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। इस पूरे महीने में शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए सात्विक जीवनशैली और खान-पान के नियमों का पालन किया जाता है। आइए जानें इस माह में खानपान से जुड़े ये नियम

MoneyControl Newsअपडेटेड May 18, 2026 पर 9:24 PM
Adhik Maas Ke Niyam: अधिक मास में करें इन चीजों से परहेज, जानें इस माह में क्या खाएं और क्या नहीं
अधिक मास में भोजन करते समय मौन रहना बहुत शुभ माना जाता है।

Adhik Maas Ke Niyam: ज्येष्ठ अधिक माह की शुरुआत हो चुकी है। इस माह को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और आध्यात्मिक महीना माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में जुड़ने अतिरिक्त मास के स्वामी स्वयं सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु हैं। हिंदू धर्म में एक इस पूरे महीने में शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए सात्विक जीवनशैली और खान-पान के नियमों का पालन किया जाता है।

इस साल अधिक मास ज्येष्ठ माह में लगा है। ये 17 मई 2026 से शुरू हुआ है और 15 जून 2026 तक चलेगा। मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। शास्त्रों में अधिक मास को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं और इन नियमों में खान-पान से जुड़े नियम भी शामिल हैं। इस दौरान क्या खाना चाहिए और किन चीजों से सख्त परहेज करना चाहिए, उसकी पूरी सूची नीचे दी गई है :

अधिक मास में खानपान के नियम

अधिकमास भगवान की साधना, दान और सात्त्विक जीवनशैली के लिए माना जाता है। इसमें खानपान पर भी संयम रखना जरूरी माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दौरान ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे फल, मौसमी सब्जियां, घर का बना सादा खाना, दालें और कम मसाले वाले व्यंजन सेवन करने की सलाह दी जाती है।

अधिक मास में ये खाएं

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