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Jaya Ekadashi 2026 Pitro Ke Upay: पितरों को पिशाच योनी से मुक्ति दिलाने के लिए जया एकादशी पर करें ये उपाय, जानें व्रत की तारीख और मुहूर्त

Jaya Ekadashi 2026 Pitro Ke Upay: जया एकादशी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पिशाच योनी से मुक्ति मिलती है। आइए जानें इसके लिए क्या उपाय कर सकते हैं और ये व्रत किस दिन है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 24, 2026 पर 7:00 AM
Jaya Ekadashi 2026 Pitro Ke Upay: पितरों को पिशाच योनी से मुक्ति दिलाने के लिए जया एकादशी पर करें ये उपाय, जानें व्रत की तारीख और मुहूर्त
माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी, 2026 को शाम 4:35 बजे होगी।

Jaya Ekadashi 2026 Pitro Ke Upay: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू वर्ष के प्रत्येक माह में दो बार एकादशी व्रत किया जाता है। इसमें से एक है जया एकादशी व्रत, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से भूत-पिशाच योनी से मुक्ति मिलती है। इस दिन अपने पितरों को पिशाच योनी से मुक्ति दिलाने के लिए भी उपाय किए जाते हैं। अगर किसी के पितृ पिशाच योनी में हैं, तो वे इससे मुक्ति के लिए अपनी संतान से मदद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ हर अमावस्या को पृथ्वी पर अपने संतान से तृप्ति की उम्मीद से आते हैं। उनकी वजह से असाध्य रोग, परिवार के सदस्यों का एक-एक करके बीमार होना, काम में असफलता, अचानक धन संकट होना पितरों की नाराजगी का संकेत होते हैं। जया एकादशी के दिन आप अपने पितरों को भूत-पिशाच योनि से बाहर निकालने का उपाय कर सकते हैं।

कब होगा जया एकादशी का व्रत

माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जनवरी, 2026 को शाम 4:35 बजे होगी। यह 29 जनवरी, 2026 को दोपहर 1:55 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, जया एकादशी का व्रत गुरुवार, 29 जनवरी, 2026 को किया जाएगा। इस व्रत का पारण 30 जनवरी, 2026 को सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक किया जा सकता है।

जया एकादशी पर पितरों के लिए उपाय

काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट ने न्यूज 18 को बताया कि पद्म पुराण में जया एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है। धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से जया एकादशी व्रत के महत्व के बारे में पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि यह व्रत जीवों को भूत, प्रेत, पिशाच जैसी योनियों से मुक्ति प्रदान करता है।

इस विधि से मिलेगी पितरों को मुक्ति

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