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Kharmas 2025: शादी की नहीं बन रही है बात, तो खरमास में करें ये उपाय लग जाएगी रिश्तों की लाइन

Kharmas 2025: खरमास का समय मांगलिक कार्यों के लिए सही नहीं माना जाता है। लेकिन इस अवधि में पूजा-पाठ, दान, ध्यान और अनुष्ठान का बहुत महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर किसी की शादी नहीं हो रही है तो खरमास में कुछ उपाय करने से उनके जीवन में खुशियां दस्तक दे सकती हैं।

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 24, 2025 पर 4:39 PM
Kharmas 2025: शादी की नहीं बन रही है बात, तो खरमास में करें ये उपाय लग जाएगी रिश्तों की लाइन
14 जनवरी को भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास का समापन हो जाएगा।

Kharmas 2025: हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को बहुत अहमियत दी जाती है। सूर्य हर माह राशि बदलते हैं। इसी क्रम में जब वो बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करते हैं, तो खरमास लगता है। खरमास में मांगलिक कार्य और नया काम शुरू करने पर रोक होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में सूर्य और बृहस्पति दोनों की ऊर्जा कमजोर होती है। ये दोनों ग्रह शुभता बढ़ाने वाले माने जाते हैं और इनकी अनुपस्थिति में मांगलिक कार्य नहीं हो सकते हैं। हालांकि, आध्यात्मिक रूप से ये अवधि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान पूजा-पाठ, स्नान-दान और अनुष्ठान का बहुत महत्व माना जाता है। खरमास में सूर्य और बृहस्पति ग्रह की पूजा करने से बहुत शभ फल प्राप्त होता है।

खरमास के दौरान जहां शादी, गौना जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते हैं, वहीं इस दौरान शादी से संबंधित कुछ उपाय किए जा सकते हैं। अगर किसी की कुंडली में विवाह दोष है, या उसकी बनती बात भी बार-बार बिगड़ जाती है, तो खरमास में इसके लिए उपाय कर सकते हैं। आइए जानें क्या हैं ये उपाय

खरमास में करें विवाह दोष दूर करने के उपाय

खरमास में शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन इस दौरान सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा में पीले रंग का उपयोग, मंत्र जाप (जैसे “ॐ श्रीं ह्रीं पूर्ण गृहस्थ सुख सिद्धये ह्रीं श्रीं ॐ नमः”), और दान-पुण्य जैसे उपाय किए जाते हैं। ये वैवाहिक जीवन में खुशी लाते हैं, घर में धन-समृद्धि लाते हैं और दोषों को शांत करते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, विवाह दोष दूर करने के लिए इन उपायों को करने से खरमास के बाद शुभ मुहूर्त शुरू होते ही विवाह के योग बनते हैं।

कब लगता है खरमास

ज्योतिष गणना के अनुसार, साल में दो बार खरमास लगता है। एक बार तब जब भगवान सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, वहीं दूसरी बार खरमास तब लगता है जब भगवान सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं। धनु और मीन दोनों ही राशियों का स्वामित्व गुरु बृस्हपति के पास है। अभी 16 दिसंबर को सूर्य ने धनु राशि में प्रवेश किया है।

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