माघी सप्तमी में आक और बेर के पत्ते से स्नान का भी महत्व है। आक के पत्तों को लोग मदार और अर्क के नाम से भी जानते हैं। पंडित मनोत्पल झा ने कहा कि भगवान सूर्य को ये पत्ता बहुत पसंद है, इसलिए उनके जन्मोत्सव के मौके पर अर्क और बेर के पत्ता से लोग स्नान करते हैं। इससे जुड़े वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बारे में उन्होंने बताया कि अर्क के पत्तों में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं और बेर के पत्तों में भी औषधीय गुण होते हैं। मान्यता है कि माघी सप्तमी में लोग इन पत्तों को अपने सिर और पैर के निचले हिस्सों में दबाकर पानी से स्नान करते हैं तो इन पत्तों से होकर वह पानी पूरे शरीर में पहुंचता है। इससे शरीर के त्वचा संबंधी कई रोगों का नाश होता है। इन पत्तों को सिर पर, हाथ में, कंधे पर और तलवे के नीचे रखकर स्नान करने से त्वचा संबंधी बीमारी खत्म होती है।