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Magha Saptami 2026: भगवान सूर्य के जन्मोत्सव का पर्व है माघ सप्तमी, जानिए इस दिन आक और बेर के पत्तों से स्नान का क्या महत्व है?

Magha Saptami 2026: माघ सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी और आरोग्य सप्तमी जैसे कई नामों से जाना जाता है। ये पर्व सूर्य भगवान के जन्मदिन पर मनाया जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठ कर आक और बेर के पत्तों से स्नान करने की परंपरा है। आइए जानें इसके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 21, 2026 पर 3:23 PM
Magha Saptami 2026: भगवान सूर्य के जन्मोत्सव का पर्व है माघ सप्तमी, जानिए इस दिन आक और बेर के पत्तों से स्नान का क्या महत्व है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माघ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था।

Magha Saptami 2026: माघ सप्तमी का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इसे अचला सप्तमी, रथ सप्तमी और आरोग्य सप्तमी आदि नामों से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। माना जाता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व आक और बेर के पत्तों के साथ स्नान करने से मनचाही इच्छा पूरी होती है।

माघ का महिना हिंदू धर्म के सबसे पवित्र मासों में से एक माना जाता है। इसी माह में माघ मेला और कल्पवास जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। माघ के महीने में ही शिशिर नवरात्रि यानी गुप्त नवरात्रि भी आती है। माना जाता है कि इस माह में गंगा स्नान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और हर बीमारी से मुक्ति मिलती है।

माघ मास में आने वाली माघ सप्तमी के व्रत का बहुत महत्व है। पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा ने नेटवर्क 18 को बताया कि महीना के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से आरोग्य, धन, ऐश्वर्य और सुख संपदा की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस साल ये पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन आक और बेर के पत्तों से स्नान का क्या महत्व है?

कब है माघ सप्तमी?

माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 24 जनवरी, शनिवार को रात में 12 बजकर 40 मिनट पर प्रारम्भ होकर 25 जनवरी, रविवार को रात 11 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, 25 जनवरी को रथ सप्तमी मनाया जाएगा।

माघ सप्तमी पूजा और स्नान मुहूर्त

माघ सप्तमी के दिन स्नान मुहूर्त – सुबह 05:26 बजे से सुबह 07:13 बजे तक

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