Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र हिंदू त्योहारों में से एक है। इसे हर साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बहुत बड़े उत्सव का अवसर माना जाता है। उस दिन पूरा देश शिवमय हो जाता है। लेकिन बहुत से भक्त शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक ही मानते हैं। मगर, शिवरात्रि और महाशिवरात्रि सुनने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन वे एक जैसे नहीं हैं। यहां दोनों में क्या अंतर है और महाशिवरात्रि क्यों खास है? इसका एक सरल और स्पष्ट अंतर समझते हैं।
क्या है महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाते हैं, वहीं मासिक शिवरात्रि का पर्व हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होता है। हालांकि महाशिवरात्रि को आप फाल्गुन मासिक शिवरात्रि कह सकते हैं क्योंकि यह फाल्गुन माह की शिवरात्रि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को ही भगवान शिव पहली बार लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। तब से उस तिथि को हर साल महाशिवरात्रि मनाई जाती है। यह भी माना जाता है कि भगवान शिव ने लिंग स्वरूप में जब दर्शन दिए थे, तब रात का समय था। इसलिए इस पर्व में रात के चार पहर पूजा विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि का अर्थ है भगवान शिव की रात्रि।
कब है महाशिवरात्रि का व्रत?
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:35 बजे समाप्त होगी। इस कारण, महाशिवरात्रि 15 फरवरी को त्रयोदशी-युक्त चतुर्दशी के साथ मनाई जाएगी।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर इस बार भद्रा काल रहेगा। हिंदू ज्योतिष के अनुसार, भद्रा के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। भक्तों को पूजा का समय सावधानी से चुनना चाहिए।
भद्रा शुरू : 15 फरवरी को शाम लगभग 5:04 बजे
भद्रा समाप्त : 16 फरवरी को सुबह लगभग 5:23 बजे
महाशिवरात्रि उपवास में इन चीजों से बचें
अनाज : चावल, गेहूं, दालें और सामान्य आटे का सेवन नहीं किया जाता है। साबूदाना या सत्तू का आटा बेहतर विकल्प हैं।
प्याज और लहसुन : इन्हें तामसिक माना जाता है। उपवास के दौरान पूरी तरह से इनसे बचा जाता है।
सामान्य नमक : आयोडीन युक्त नमक से बचा जाता है। सेंधा नमक (सेंधा नमक) की अनुमति है।
मसालेदार भोजन : तेज मसाले पाचन और मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। हल्का, सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है।
मांसाहारी भोजन : सभी प्रकार के मांसाहारी व्यंजन सख्ती से वर्जित हैं।