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Pradosh Vrat Date: मार्च और चैत्र का अंतिम प्रदोष व्रत होगा इस दिन, जानें व्रत की सही तारीख पूजा का मुहूर्त और महत्व

Pradosh Vrat Date: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को चैत्र और मार्च का अंतिम प्रदोष व्रत किया जाएगा। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। समस्त संसार के शिव भक्त अपने प्रिय महादेव की कृपा पाने के लिए ये व्रत करते हैं। आइए जानें इसकी सही तारीख, मुहूर्त और महत्व

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 26, 2026 पर 8:25 PM
Pradosh Vrat Date: मार्च और चैत्र का अंतिम प्रदोष व्रत होगा इस दिन, जानें व्रत की सही तारीख पूजा का मुहूर्त और महत्व
प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

Pradosh Vrat Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। यह व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस तरह पूरे हिंदू वर्ष में ये व्रत 24 बार किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व होता है। भक्त उपवास रखकर संध्या काल में पूजा-अर्चना करते हैं और नियमपूर्वक व्रत का पारण करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सही विधि से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर कर मनोकामनाएं पूर्ण करता है। उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, 19 मार्च को हिंदू नववर्ष की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि हिन्दू नववर्ष का पहला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा।

सोम प्रदोष व्रत तारीख

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च 2026 को सुबह 7.09 मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 31 मार्च 2026 को सुबह 6.55 पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत सोमवार 30 मार्च को रहेगा। सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष व्रत कहलाएगा।

प्रदोष काल पूजा मुहूर्त

30 मार्च को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 38 मिनट पर शुरू होगा। ये मुहूर्त रात 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

सोम प्रदोष का क्या अर्थ?

सोमवार के दिन पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि को सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ प्रभाव दे रहा हो, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी होता है। साथ ही, संतान सुख की इच्छा रखने वाले लोग भी इस व्रत को आस्था के साथ करते हैं।

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