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Sakat Chauth 2026: संतान की सलामती के लिए इस दिन किया जाएगा सकट चौथ का व्रत, जानें सही तारीख पूजा विधि और मुहूर्त

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। साथ ही इस व्रत में चंद्र देव की भी पूजा और अर्घ्य देने का विधान है। यह पर्व हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। आइए जानें इस साल इस व्रत की सही तारीख, पूजा विधि और मुहूर्त

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 04, 2026 पर 7:00 AM
Sakat Chauth 2026: संतान की सलामती के लिए इस दिन किया जाएगा सकट चौथ का व्रत, जानें सही तारीख पूजा विधि और मुहूर्त
यह व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है।

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ का व्रत माताएं अपनी संतान के संकटों को दूर करने के लिए करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने वाली माताओं पर आने वाले हर संकट को सकट माता और भगवान गणेश हर लेते हैं। यह व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान गणेश के साथ ही सकट माता और चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। शाम को चांद के दर्शन और पूजा के बाद उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही इस व्रत को पूरा माना जाता है। सकट चौथ को संकष्टि चतुर्थी, माघी चौथ और तिल कुटा चौथ जैसे कई नामों से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश को भोग में तिल के लड्डू विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।

क्यों पड़ा तिल कुटा चौथ नाम

सकट चौथ को 'तिल-कुटा' चौथ इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें तिल विशेष रूप से भोग लगाया जाता है। स्त्रियां इस दिन पूजा में तिल का पहाड़ बनाती हैं, जिसे बाधा का प्रतीक माना जाता है। जिसे पूजा करते समय चांदी के सिक्के से बीच में काटकर संतान के लिए मंगलकामना की जाती है।

संकष्टि चतुर्थी व्रत तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि 06 जनवरी 2026 को प्रात:काल 08:01 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 07 जनवरी 2026 को प्रात:काल 06:52 बजे समाप्त होगी। ऐसे में सकट चौथ का व्रत 06 जनवरी 2026, मंगलवार के दिन ही मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय रात्रि को 08:54 बजे होगा।

सकट चौथ की पूजा विधि

सकट चौथ व्रत के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद भगवान गणेश की पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थान पर एक चौकी पर लाल या हरा आसन बिछा कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उनकी विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में गणपति की प्रिय चीजें जैसे दूर्वा, मोदक, तिल के लड्डू आदि अवश्य अर्पित करें। गणपति की पूजा के बाद सकट चौथ व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इस दिन उगते हुए चंद्र देवता की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। ऐसे में चंद्रोदय के समय उनका विधि-विधान से पूजन एवं दर्शन करें

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