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अकेलेपन का इलाज अब किराये पर, जानिए कैसे मिल रहे हैं संगी-साथी

New Trend: तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती जीवनशैली ने अकेलेपन को आज एक नई पहचान दे दी है। ये अब सिर्फ मानसिक समस्या नहीं, बल्कि एक उभरता सामाजिक चलन बन रहा है। महानगरों में लोग अकेलापन दूर करने के लिए किराये पर संगति तलाश रहे हैं, जिसे विशेषज्ञ ‘लोनलीनेस इकॉनमी’ का नाम दे रहे हैं।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 05, 2026 पर 1:12 PM
अकेलेपन का इलाज अब किराये पर, जानिए कैसे मिल रहे हैं संगी-साथी
लोग अब डिजिटल चैट से आगे बढ़कर असली इंसानी संवाद की तलाश कर रहे हैं।

तेज रफ्तार जिंदगी, बढ़ता काम का दबाव और बदलती सामाजिक संरचना ने अकेलेपन को आज एक नई पहचान दे दी है। ये अब केवल मन की स्थिति या व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गया, बल्कि एक उभरता हुआ सामाजिक और आर्थिक ट्रेंड बन चुका है। महानगरों में रहने वाले लाखों लोग भीड़ के बीच रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। परिवार से दूरी, सीमित दोस्ती, डिजिटल बातचीत और व्यस्त दिनचर्या ने इंसानी जुड़ाव को कमजोर किया है। इसी खालीपन को भरने के लिए अब लोग संगति, बातचीत और साथ बैठने जैसे अनुभवों के लिए पैसे खर्च करने को तैयार हैं।

ये चलन धीरे-धीरे ‘लोनलीनेस इकॉनमी’ के रूप में सामने आ रहा है, जहां अकेलापन एक भावना नहीं, बल्कि एक नया बाजार बनता जा रहा है। लोग अब स्क्रीन के पीछे की दुनिया से बाहर निकलकर असली बातचीत और भरोसेमंद इंसानी संपर्क की तलाश कर रहे हैं, जो इस बदलते सामाजिक व्यवहार की साफ झलक देता है।

जब साथ बैठने के लिए भी लोग देने लगे पैसे

इस उभरते ट्रेंड में लोग बातचीत, साथ समय बिताने और भावनात्मक जुड़ाव के लिए भुगतान करने को तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया ने लोगों को जुड़े रहने का भ्रम तो दिया, लेकिन आमने-सामने की बातचीत की कमी ने भावनात्मक दूरी को और बढ़ा दिया। नौकरी के लिए शहर बदलना, परिवार से दूर रहना और सीमित सामाजिक दायरा अकेलेपन को गहरा कर रहा है।

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