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महुआ की लकड़ी से बने घरों के आगे फेल है सीमेंट की मजबूती! इसकी खासियत जान रह जाएंगे हैरान

Mahua Wood Durability: छतरपुर जिले के नेगुवां गांव में 500 साल पुराने महुआ की लकड़ी से बने घर आज भी मजबूत स्थिति में खड़े हैं। यह लकड़ी अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए जानी जाती है। इसमें न दरार आती है और न ही दीमक या घुन का असर होता है, जो इसे बेहद खास बनाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 09, 2025 पर 1:04 PM
महुआ की लकड़ी से बने घरों के आगे फेल है सीमेंट की मजबूती! इसकी खासियत जान रह जाएंगे हैरान
Mahua Wood Durability: महुआ लकड़ी से बने घर 500 साल बाद भी मजबूत हैं

जब भी गांवों में मजबूत और टिकाऊ घरों की बात होती है, तो छतरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में महुआ की लकड़ी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह कोई नई परंपरा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी वह तकनीक है, जो आज भी अपनी मजबूती और विश्वसनीयता के लिए जानी जाती है। महुआ का पेड़ जहां एक ओर स्वादिष्ट फल और औषधीय गुणों से भरपूर होता है, वहीं इसकी लकड़ी गांवों के कच्चे-पक्के मकानों की नींव में उपयोग की जाती रही है। बुजुर्गों का मानना है कि महुआ की लकड़ी समय के साथ सड़ती नहीं, दीमक नहीं लगती और न ही जल्दी कमजोर होती है।

यही वजह है कि आज भी छतरपुर के कई गांवों में मकान निर्माण के दौरान इसकी मांग बनी रहती है। यह परंपरा सिर्फ सांस्कृतिक नहीं, बल्कि टिकाऊ जीवनशैली और देसी ज्ञान की मिसाल भी है।

नेगुवां गांव का 500 साल पुराना घर आज भी है मजबूत

छतरपुर जिले के नेगुवां गांव में एक ऐतिहासिक मकान मौजूद है, जो करीब 500 साल पुराना है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि जब गांव की स्थापना हुई थी, उसी समय ये घर, एक कुआं और राम-जानकी मंदिर बनाया गया था। इस घर में 365 महुआ लकड़ियों की बीम (करी) लगी हैं, जो आज भी बिल्कुल वैसी की वैसी हैं – मजबूत और स्थिर।

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