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क्या होता है सर्किल रेट, इससे कैसे तय होती है प्रॉपर्टी की कीमत? जानिए हर एक डिटेल

सर्किल रेट प्रॉपर्टी खरीदते समय स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन खर्च और होम लोन पर असर डालता है। इसे समझे बिना प्रॉपर्टी खरीदना घाटे का सौदा हो सकता है, क्योंकि असली लागत इसी पर निर्भर करती है। जानिए पूरी डिटेल।

Suneel Kumarअपडेटेड May 05, 2026 पर 5:09 PM
क्या होता है सर्किल रेट, इससे कैसे तय होती है प्रॉपर्टी की कीमत? जानिए हर एक डिटेल
सर्किल रेट का सीधा असर आपके होम लोन पर पड़ता है।

घर खरीदते समय ज्यादातर लोग लोकेशन, कीमत और बजट पर ध्यान देते हैं। लेकिन, एक चीज है जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है- सर्किल रेट। यही वह आंकड़ा है जो तय करता है कि आपकी प्रॉपर्टी पर कितना टैक्स लगेगा, रजिस्ट्रेशन में कितना खर्च आएगाष कई बार तो यह भी कि आपको कितना होम लोन मिलेगा।

दिलचस्प बात यह है कि भले ही आप कम कीमत पर डील करें, लेकिन सरकार सर्किल रेट के हिसाब से ही वैल्यू मानेगी। ऐसे में सर्किल रेट को समझे बिना प्रॉपर्टी खरीदना मतलब अधूरी जानकारी के साथ बड़ा फैसला लेना है।

सर्किल रेट क्या होता है?

सर्किल रेट वह न्यूनतम कीमत होती है, जिसे राज्य सरकार किसी इलाके में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के रजिस्ट्रेशन के लिए तय करती है। इसे रेडी रेकनर रेट भी कहा जाता है। प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी इसी रेट के आधार पर तय होती है।

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