हर साल 25 दिसंबर आते ही दुनियाभर में क्रिसमस की रौनक दिखाई देने लगती है। चर्चों में प्रार्थनाएं होती हैं, घरों और बाजारों में सजावट नजर आती है और लोग इस दिन को यीशु मसीह के जन्म के रूप में मनाते हैं। इसी बीच अक्सर एक सवाल चर्चा में आ जाता है कि मुसलमान, जो ईसा मसीह का गहरा सम्मान करते हैं और उन्हें अल्लाह का पैगंबर मानते हैं, आखिर क्रिसमस क्यों नहीं मनाते। ये सवाल इसलिए भी दिलचस्प हो जाता है क्योंकि इस्लाम में ईसा मसीह का उल्लेख कुरान में कई बार मिलता है और उनकी मां मरियम को भी बेहद पवित्र माना गया है।
