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असीम मुनीर का फील्ड मार्शल बनना, पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी! अयूब खान की तरह तख्तापलट न कर दें 'मुल्ला मुनीर'

असीम मुनीर के फील्ड मार्शल बनाए जाने की घोषणा के बाद अयूब खान को याद करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इतिहास बताता है कि पाकिस्तान में फील्ड मार्शल के रिकॉर्ड कुछ अच्छे नहीं रहे हैं। ऐसे में ये जानना इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि पाकिस्तान में वजीरों से ज्यादा ताकत जनरलों के पास होती है। चलिए जानते हैं कि आखिर मुनीर का फील्ड मार्शल बनना पाकिस्ता के लिए क्यों है खतर की घंटी

Shubham Sharmaअपडेटेड May 21, 2025 पर 10:10 AM
असीम मुनीर का फील्ड मार्शल बनना, पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी! अयूब खान की तरह तख्तापलट न कर दें 'मुल्ला मुनीर'
Pakistan: असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने की घोषणा के बाद अयूब खान को याद करना भी बेहद जरूरी है

पाकिस्तान ने सेना प्रमुख असीम मुनीर को प्रमोशन देकर फील्ड मार्शल बनाने का ऐलान किया है। फील्ड मार्शल पारंपरिक रूप से सेनाओं में एक मानद रैंक होती है। फील्ड मार्शल का पद ब्रिटिश सेना से लिए गए नाम पर बना सेना का सर्वोच्च पद है। यह टॉप मिलिट्री अथॉरिटी का एक प्रतीक है, जो आमतौर पर असाधारण वॉर टाइम लीडरशिप के सम्मान में दिया जाता है। मुनीर पाकिस्तान के दूसरे फील्ड मार्शल होंगे। पूर्व राष्ट्रपति और मिलिट्री तानाशाह मोहम्मद अयूब खान पाकिस्तान के पहले फील्ड मार्शल थे और मजे की बात ये है कि उन्होंने खुद ही खुद को इस सर्वोच्च पद से नवाजा था। अयूब खान ही वो शख्स थे, जिन्होंने पाकिस्तान में पहली बार सैन्य तख्तापलट कर, सरकार को सत्ता से बेदखल किया और मिलिट्री शासन यानी मार्शल लॉ लगाया।

असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने की घोषणा के बाद अयूब खान को याद करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इतिहास बताता है कि पाकिस्तान में फील्ड मार्शल के रिकॉर्ड कुछ अच्छे नहीं रहे। ऐसे में ये जानना इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि पाकिस्तान में वजीरों से ज्यादा ताकत जनरलों के पास होती है। चलिए जानते हैं कि आखिर मुनीर का फील्ड मार्शल बनना पाकिस्तान के लिए क्यों है खतरे की घंटी?

अयूब खान को सेना प्रमुख बनाना विवादित फैसला

इसके लिए हमें सबसे पहले इतिहास के पन्ने पलटने होंगे, जिसकी शुरुआत अयूब खान से होती है। आजादी और बंटवारे के बाद अयूब खान पाकिस्तानी सेना में सबसे वरिष्ठ मुस्लिम अधिकारियों में से एक थे।

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