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हिजबुल्लाह के हाई-टेक ड्रोनों ने इजरायली सीमा पर मचाया कोहराम, यूक्रेन के फॉर्मूले से 'आयरन डोम' में लगाई सेंध

Hezbollah Drone: यह ड्रोन तकनीक सबसे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध में देखी गई थी, जहां दोनों पक्षों ने भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने के लिए इसका इस्तेमाल किया। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, हीजबुल्ला ने यूक्रेन के इन अनुभवों से सबक लेकर स्थानीय स्तर पर ही इन ड्रोनों को असेंबल किया है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Apr 30, 2026 पर 1:47 PM
हिजबुल्लाह के हाई-टेक ड्रोनों ने इजरायली सीमा पर मचाया कोहराम, यूक्रेन के फॉर्मूले से 'आयरन डोम' में लगाई सेंध
ये ड्रोन बहुत छोटे होते हैं, कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और कोई इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल नहीं छोड़ते, जिससे रडार इन्हें डिटेक्ट नहीं कर पाता

Hezbollah Fiber-Optic Drones: लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष जारी है। इस भीषण युद्ध में हिजबुल्लाह ने एक बेहद खतरनाक और नई पीढ़ी के 'फाइबर-ऑप्टिक' ड्रोनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह तकनीक इजरायल के अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और रडार शील्ड के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में सफल रही यह तकनीक अब मिडिल ईस्ट में हवाई युद्ध के पैमानों को बदल रही है।

क्या है 'फाइबर-ऑप्टिक' ड्रोन तकनीक?

पारंपरिक ड्रोन रेडियो सिग्नल या सैटेलाइट के जरिए चलते हैं, लेकिन फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन एक बेहद पतले तार से अपने ऑपरेटर से जुड़े होते हैं। ये ड्रोन 30 से 50 किलोमीटर लंबे फाइबर-ऑप्टिक तार के जरिए मैसेज प्राप्त करते हैं। चूंकि ये ड्रोन रेडियो तरंगों का उपयोग नहीं करते, इसलिए इजरायल के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम इन्हें जैम या रास्ता भटकाने में असमर्थ हैं। ऑपरेटर को बिना किसी रुकावट के रीयल-टाइम में उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो मिलते हैं, जिससे सटीक हमला करना आसान हो जाता है।

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