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अमेरिका के एक फैसले से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप, भारत की जेब पर भी पड़ेगा बड़ा असर!

Russian Oil: अमेरिका का यह सख्त रुख ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पहले ही अस्थिर हैं। रूस और ईरान पर नकेल कसने से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई कम हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Apr 16, 2026 पर 10:20 AM
अमेरिका के एक फैसले से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप, भारत की जेब पर भी पड़ेगा बड़ा असर!
रूसी तेल पर छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई, जबकि ईरानी तेल के लिए दी गई छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी

US End Oil Waivers: अमेरिका के एक फैसले ने फिर से वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दिया है। व्हाइट हाउस में ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की है कि रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई 'अस्थाई छूट' को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि अब इन दोनों देशों से तेल खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार फिर से लटकने लगी है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर काफी हद तक निर्भर हैं।

क्या है अमेरिका का नया फरमान?

ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने साफ किया कि जो लाइसेंस दिए गए थे, वे केवल उस तेल के लिए थे जो 11 मार्च से पहले समुद्र में था। रूसी तेल पर छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई, जबकि ईरानी तेल के लिए दी गई छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो देश अब भी ईरानी तेल खरीदेंगे या जिनका पैसा बैंकों में रखेंगे, उन पर 'सेकेंडरी प्रतिबंध' लगाए जाएंगे। बेसेंट ने इसे वित्तीय जगत की 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसा बताया है।

भारत पर क्या होगा इसका असर?

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