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एक साल में 40 किलो वाली बकरी बनी किसान का बड़ा सोना, जानें पूरा सच

Goat farming Benefits: जहानाबाद के किसान भरत पासवान बीटल नस्ल की बकरी पालन कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। तोते जैसे मुंह वाली यह नस्ल सालाना 40 किलो वजन तक बढ़ती है और रोजाना 3 किलो दूध देती है। कम खर्च में पाली जाने वाली इन बकरियों की भारी मांग है, व्यापारी ₹15,000 तक भुगतान करते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 06, 2026 पर 1:16 PM
एक साल में 40 किलो वाली बकरी बनी किसान का बड़ा सोना, जानें पूरा सच
Goat farming Benefits: एक महीने में सिर्फ 300 रुपये तक का खर्च आता है

ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि इसमें ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती और मुनाफा अच्छा मिलता है। सरकार भी आर्थिक मदद देती है, जिससे छोटे किसान आसानी से इस व्यवसाय को अपना लेते हैं। अब यह व्यवसाय बड़े पैमाने पर फैल रहा है और कई बड़े फार्म भी खुले हैं। बिहार के अलावा जहानाबाद में भी कई बकरीपालक इस काम को बड़े स्तर पर कर रहे हैं।

भरत पासवान का अनुभव

जहानाबाद के मोदनगंज प्रखंड के मिल्की पर रहने वाले भरत पासवान 4 साल से बकरी पालन कर रहे हैं। 6 बकरियों के साथ शुरूआत करने वाले भरत के पास अब 50 बकरियां हैं, जिनमें ब्लैक बंगाल, जमनापारी और हाल ही में लाई गई बीटल नस्ल शामिल हैं। भरत का कहना है कि बीटल नस्ल ड्यूल उद्देश्य के लिए उत्तम है, यानी दूध और मीट दोनों के लिए उपयोगी।

बीटल नस्ल की खासियत

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