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Budget 2025: इनवेस्टर्स और टैक्सपेयर्स की वित्तमंत्री से ये हैं 10 सबसे बड़ी मांगें

इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स में कमी करने की सलाह दी है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी 10-15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना इनकम वाले लोगों को कंपनियों से ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। अगर सरकार टैक्स का बोझ कम करती है तो कंजम्प्शन बढ़ेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 24, 2025 पर 5:59 PM
Budget 2025: इनवेस्टर्स और टैक्सपेयर्स की वित्तमंत्री से ये हैं 10 सबसे बड़ी मांगें
टैक्सपेयर्स का कहना है कि बैंक की टैक्स-सेविंग्स फिक्स्ड डिपॉजिट के लॉक-इन पीरियड को घटाकर 3 साल किया जाए।

यूनियन बजट 2025 ऐसे वक्त आ रहा है, जब इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार का सबसे ज्यादा फोकस ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर होगा। इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स में कमी करने की सलाह दी है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी 10-15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना इनकम वाले लोगों को कंपनियों से ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। अगर सरकार टैक्स का बोझ कम करती है तो कंजम्प्शन बढ़ेगा, क्योंकि लोगों के हाथ में खर्च के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे। इनवेस्टर्स और टैक्सपेयर्स ने सरकार के सामने 10 मांगें रखी हैं।

1. स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जाए। अभी इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है। नई रीजीम में यह 75,000 रुपये है।

2. सालाना 10 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाए। अभी ओल्ड रीजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 2.5 लाख और नई रीजीम में 3 लाख रुपये है।

3. हेल्थ पॉलिसी पर सेक्शन 80डी के तहत डिडक्शन बढ़ाया जाए। अभी 60 साल से कम उम्र के व्यक्ति को हेल्थ पॉलिसी पर 25,000 रुपये और 60 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्ति को 50,000 रुपये डिडक्शन मिलता है।

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