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Budget 2025: क्या है सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स, STT हटाने की मांग क्यो हो रही है?

सरकार को STT से इस साल 1 अप्रैल से 17 दिसंबर के बीच 40,114 करोड़ रुपये मिले हैं। स्टॉक मार्केट्स में वॉल्यूम बढ़ने पर एसटीटी कलेक्शन बढ़ता है। स्टॉक एक्सचेंज में होने वाले हर ट्रांजेक्शन पर एसटीटी लगता है और यह पैसा सरकार को टांसफर कर दिया जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 31, 2024 पर 11:24 PM
Budget 2025: क्या है सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स, STT हटाने की मांग क्यो हो रही है?
STT डिलीवरी आधारित स्टॉक ट्रांजेक्शन के साथ एफएंडओ सौदों पर भी लागू होता है।

सरकार ने इस साल यूनियन बजट में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के सौदों पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का ऐलान किया था। 1 अक्टूबर, 2024 से यह वृद्धि लागू हो गई है। स्टॉक मार्केट्स से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसटीटी की वजह से शेयरों में निवेश की लागत बढ़ जाती है। दरअसल, यह एक तरह का टैक्स है, जो शेयरों की खरीद और बिक्री पर लागू होता है। यह डिलीवरी आधारित स्टॉक ट्रांजेक्शन के साथ एफएंडओ सौदों पर भी लागू होता है।

एसटीटी से 40000 करोड़ रुपये रेवेन्यू

सरकार को STT से इस साल 1 अप्रैल से 17 दिसंबर के बीच 40,114 करोड़ रुपये मिले हैं। स्टॉक मार्केट्स में वॉल्यूम बढ़ने पर एसटीटी कलेक्शन बढ़ता है। स्टॉक एक्सचेंज में होने वाले हर ट्रांजेक्शन पर एसटीटी लगता है और यह पैसा सरकार को टांसफर कर दिया जाता है। इस तरह यह सरकार के लिए रेवेन्यू का एक स्रोत है। हालांकि, दूसरे टैक्स के मुकाबले एसटीटी से मिलने वाला पैसा काफी कम है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे हटाने से स्टॉक मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।

शेयर ट्रांजेक्शंस पर एसटीटी के रेट्स

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