इकोनॉमिक ग्रोथ में इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हाथ रहा है। कोविड के बाद अनिश्चितता बढ़ने की वजह से प्राइवेट सेक्टर के पूंजीगत खर्च में कमी देखने को मिली। फिर सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने का फैसला किया। सरकार ने यूनियन बजट में कैपिटल इनवेस्टमेंट बढ़ाने का ऐलान किया। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के मौके बने और इकोनॉमी की ग्रोथ को भी बढ़ावा मिला। रोजगार के नए मौके बनने से कंजम्प्शन भी बढ़ा।
बजट में पूंजीगत खर्च पर सरकार का फोकस बना रहेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "इंडिया में रिफॉर्म्स की रफ्तार बढ़ रही है। इसमें निवेश बढ़ाने पर सरकार के फोकस और डिमांड को बढ़ावा देने वाली पॉलिसीज का हाथ है...।" इससे पता चलता है कि Union Budget 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए पूंजीगत खर्च पर सरकार का फोकस बना रहेगा।
एक्सपोर्ट आधारित सेक्टर्स में पूंजीगत खर्च सुस्त
अमेरिका के काफी ज्यादा टैरिफ लगाने की वजह से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता की स्थिति है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ भी सुस्त है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसका असर पड़ा है। सीमेंट, स्टील और डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे ग्रीनफील्ड सेक्टर्स में अच्छा प्राइवेट इनवेस्टमेंट हो रहा है, लेकिन एक्सपोर्ट आधारित सेक्टर्स में प्राइवेट इनवेस्टमेंट सुस्त बना हुआ है। कमजोर एक्सपोर्ट्स और घटते प्राइवेट इनवेस्टमेंट को देखते हुए सरकार यूनियन बजट में पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखेगी।
पूंजीगत खर्च का टारगेट 17 फीसदी बढ़ सकता है
रेटिंग एजेंसी ICRA का मानना है कि सरकार अगले वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च का टारगेट बढ़ाकर 13.10 लाख करोड़ करेगी। यह FY26 के 11.21 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से करीब 17 फीसदी ज्यादा है। इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में सरकार का पूंजीगत खर्च 6.60 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले साल के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा है। इक्रा का अनुमान है कि सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में FY26 के पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर 11.50 लाख करोड़ रुपये कर सकती है। इक्रा का अनुमान अगर सही रहता है तो पूंजीगत खर्च और जीडीपी का अनुपात बढ़कर 3.3 फीसदी तक पहुंच सकता है।
ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 7 फीसदी बढ़ सकता है
इक्रा को केंद्र सरकार का ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 7.1 फीसदी बढ़कर 44 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाने का अनुमान है। डायरेक्ट टैक्सेज की ग्रोथ साल दर साल आधार पर 11.1 फीसदी तक पहुंच सकती है। इनडायरेक्ट टैक्सेज की ग्रोथ थोड़ा सुस्त करीब 2 फीसदी रह सकती है। इसकी वजह सितंबर 2025 से जीएसटी रेट्स में कमी है। सरकार का नॉन-टैक्स रेवेन्यू FY27 में 5 फीसदी बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर साल दर साल आधार पर 4 फीसदी बढ़ सकता है।
फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.3 फीसदी रह सकता है
रेटिंग एजेंसी का मानना है कि FY27 में सरकार का फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 4.3 फीसदी रह सकता है। यह FY26 के 4.4 फीसदी के बजट अनुमान से कम है। पूंजीगत खर्च 17 फीसदी बढ़ने के बावजूद सरकार का फिस्कल डेफिसिट कम रहेगा। इसकी वजह कम रेवेन्यू एक्सपेंडिचर है। इसके अलावा केंद्र की तरफ से राज्यों को मिलने वाला जीएसटी कंपनसेशन भी FY26 में खत्म हो गया है। FY27 में सरकार को राज्यों को जीएसटी कंपनसेशन का पेमेंट नहीं करना होगा।