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Budget 2026 : बजट में इंफ्रा और कंजम्पशन को बढ़ावा मिलने पर मार्केट में शुरू हो सकता है बुल रन : हिमानी शाह

Budget 2026:एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट की हिमानी शाह ने कहा कि भारत को यूनियन बजट में फिस्कल डिस्प्लिन और ग्रोथ पर फोकस वाले स्टिमुलस के बीच एक 'सुनहरा संतुलन' बनाना चाहिए। अगर बजट में इंफ्रा और कंजम्पशन को बढ़ावा मिलता है तो हमारे मार्केट में लंबे समय तक चलने वाला बुल रन शुरू हो सकता है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jan 26, 2026 पर 1:14 PM
Budget 2026 : बजट में इंफ्रा और कंजम्पशन को बढ़ावा मिलने पर मार्केट में शुरू हो सकता है बुल रन : हिमानी शाह
Budget 2026 Expectations : हिमानी शाह ने कहा कि जब तक सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखती है,तब तक वो कैपिटल गुड्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर को लेकर बुलिश हैं

Budget 2026 :  बाज़ार 'लोकप्रिय' बजट नहीं, बल्कि 'व्यावहारिक' बजट की तलाश में हैं। भारत को यूनियन बजट में फिस्कल डिस्प्लिन और ग्रोथ पर फोकस वाले स्टिमुलस के बीच एक 'सुनहरा संतुलन' बनाना चाहिए। अगर बजट में इंफ्रा और कंजम्पशन को बढ़ावा मिलता है तो हमारे मार्केट में लंबे समय तक चलने वाला बुल रन शुरू हो सकता है। ये बातें एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट की को-फंड मैनेजर हिमानी शाह ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर सरकार एक ऐसा रोडमैप पेश कर पाती है जो 11 लाख करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटमेंट पुख्ता करे और साथ ही मिडिल क्लास को खर्च करने लायक इनकम दे (ताकि कंजम्पशन बढ़े) तो मौजूदा मार्केट करेक्शन कई सालों तक चलने वाली बुल रन का रास्ता खोल सकता है। उन्हें उम्मीद है कि आगामी बजट में कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और रिटेल,इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल्स और फाइनेंशियल जैसे तीन सेक्टरों पर फोकस रहेगा।

उन्होनें आगे कहा कि जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 के करीब आ रहे हैं,भारतीय अर्थव्यवस्था एक नाज़ुक मोड़ पर खड़ी दिख रही है। पिछले कुछ सालों में हमने देश का 'हार्ड' इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर ज़ोर दिया है,लेकिन मौजूदा मार्केट का माहौल हाई-मल्टीप्लायर कैपिटल खर्च (कैपेक्स) को बनाए रखने और ठहरी हुई खपत को फिर से शुरू करने के बीच खींचतान के संकेत दे रहा है। ऐसे में भारत को यूनियन बजट में फिस्कल डिस्प्लिन और ग्रोथ पर फोकस वाले स्टिमुलस के बीच एक 'सुनहरा संतुलन' बनाने की जरूरत है।

ग्लोबल ट्रेड की अनिश्चितता और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के दौर में,भारत कैपेक्स पर अपनी रफ्तार कम नहीं कर सकता। ऐसे में समय में जब दुनिया के ज्यादातक देश ज़्यादा से ज़्यादा अपने बारे में सोच रहे हैं और संरक्षणवाद बढ़ रहा है, हमारे बजट में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस समय दुनिया भारत को मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक अहम विकल्प के तौर पर देख रहे। इसकी वजह हमारी बड़ी और युवा लेबर फोर्स है।

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