देश के निर्यातकों ने आगामी बजट में टैक्स इंसेंटिव, इंपोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने और वैश्विक बाजारों में ब्रांडिंग व मार्केटिंग के लिए वित्तीय मदद की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि इन कदमों से वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। निर्यातकों ने सुझाव दिया है कि बजट में 'इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी' का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी में तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल, कंपोनेंट या इंटरमीडिएट्स पर अधिक इंपोर्ट ड्यूटी रहती है। यह घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रभावित करती है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) ने ज्यादातर माल विदेश में बेचने वाली इंडस्ट्रीज द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की है।
उदाहरण के तौर पर सिंथेटिक धागे और फाइबर पर तैयार कपड़ों की तुलना में अधिक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। इससे कपड़ा उद्योग प्रभावित हो रहा है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे कि प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कनेक्टर और सब-असेंबलीज पर इंपोर्टेड यानि कि आयातित तैयार इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स से ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी है। केमिकल और प्लास्टिक सेक्टर में भी बेसिक कच्चे माल पर तैयार माल से ज्यादा टैक्स है। लेदर और फुटवियर क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर भी हाई ड्यूटी के कारण भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को नुकसान हो रहा है।
ड्यूटी कम होने से घटेगी उत्पादन लागत
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FIEO के प्रेसिडेंट एस सी रल्हन का कहना है, "कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी को कम करने या उसमें सुधार करने से उत्पादन लागत कम होगी। साथ ही वर्किंग कैपिटल का दबाव घटेगा और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी मजबूत होगी।" उन्होंने विदेशी शिपिंग लाइन्स पर भारत की बेहद ज्यादा निर्भरता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे निर्यातकों को ऊंचे भाड़े, सप्लाई में रुकावट और वैश्विक दरों में अस्थिरता की मार झेलनी पड़ती है। इसके अलावा, FIEO ने नई घरेलू मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए 15 प्रतिशत की रियायती कॉरपोरेट टैक्स रेट को कम से कम 5 साल और बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने बजट में वित्तीय प्रोत्साहन और कर्ज पर ब्याज सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है, ताकि कपड़ा क्षेत्र अमेरिकी टैरिफ के झटके से उबर सके। AEPC के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने टेक्सटाइल मशीनरी पर GST दरों में कटौती और माइक्रो यूनिट्स के लिए एक नई टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन स्कीम का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परिधान क्षेत्र वर्तमान में बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल का सामना कर रहा है। अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में ऊंचे टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने ट्रेड के फ्लो, लॉजिस्टिक्स और मांग को बुरी तरह प्रभावित किया है।
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) ने बोवाइन क्रस्ट (जानवरों की खाल से बना सेमी-फिनिश्ड चमड़ा) और फिनिश्ड लेदर के इंपोर्ट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट को फिर से लागू करने का अनुरोध किया है। काउंसिल ने IGCR (रियायती दर पर माल का इंपोर्ट) योजना में भी बदलाव करने की अपील की है। इसी तरह, स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री ने विलो (बैट बनाने में इस्तेमाल होने वाला) और बेंत पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की सिफारिश की है।