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TDS और TCS में बड़े बदलाव, किराया और पढ़ाई के खर्च पर आम आदमी को मिलेगी राहत

वित्त अधिनियम 2025 के तहत टीडीएस और टीसीएस से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। किराये पर टीडीएस के नियम अब पहले से ज्यादा सरल हो गए हैं। पहले सालाना 2.4 लाख रुपये से ज्यादा किराया होने पर 10 प्रतिशत टीडीएस काटना जरूरी था

Edited By: Sheetalअपडेटेड Jan 27, 2026 पर 7:03 PM
TDS और TCS में बड़े बदलाव, किराया और पढ़ाई के खर्च पर आम आदमी को मिलेगी राहत
वित्त अधिनियम 2025 के तहत टीडीएस और टीसीएस से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं।

वित्त अधिनियम 2025 के तहत टीडीएस और टीसीएस से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। किराये पर टीडीएस के नियम अब पहले से ज्यादा सरल हो गए हैं। पहले सालाना 2.4 लाख रुपये से ज्यादा किराया होने पर 10 प्रतिशत टीडीएस काटना जरूरी था, लेकिन अब वित्त वर्ष 2025-26 से सालाना सीमा हटाकर मासिक सीमा लागू कर दी गई है। नए नियम के अनुसार, अगर किसी महीने का किराया 50,000 रुपये से अधिक है, तभी टीडीएस कटेगा। इसका मतलब यह है कि अब सालाना 6 लाख रुपये तक का किराया टीडीएस से मुक्त रहेगा। इससे बड़ी संख्या में टैक्स ऑडिट वाले करदाताओं को राहत मिलेगी और मकान मालिकों को बिना कटौती के ज्यादा किराया मिल सकेगा, जिससे उनका कैश फ्लो बेहतर होगा। वहीं, टैक्स ऑडिट के दायरे से बाहर आने वाले व्यक्तियों और HUF के लिए किराये पर टीडीएस की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे मकान मालिकों को अतिरिक्त फायदा मिलेगा।

इसी तरह विदेश में पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर टीसीएस के नियमों को भी आसान बनाया गया है। पहले स्वयं के खर्च पर पढ़ाई के लिए विदेश भेजी जाने वाली रकम पर 7 लाख रुपये तक टीसीएस नहीं लगता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। यानी 10 लाख रुपये तक की रकम पर कोई टीसीएस नहीं लगेगा और इससे ऊपर की अमाउंट पर ही 5 प्रतिशत टीसीएस देना होगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि एजुकेशन लोन के जरिए विदेश भेजी जाने वाली रकम पर अब पूरी तरह से टीसीएस हटा दिया गया है, चाहे रकम कितनी भी हो, बशर्ते लोन किसी मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्था से लिया गया हो। इससे विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव कम होगा और पढ़ाई के खर्च को मैनेज करना आसान बनेगा।

इन बदलावों का एक और फायदा यह है कि अगर किसी कारण से टीसीएस कट भी जाता है, तो उसे सैलरी पर लगने वाले टैक्स या अन्य कर देनदारियों के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। करदाता इसे एडवांस टैक्स के समय या इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त भी समायोजित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, टीडीएस और टीसीएस के ये संशोधित नियम टैक्स व्यवस्था को ज्यादा सरल और व्यावहारिक बनाते हैं। इससे न सिर्फ लोगों की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि टैक्स अनुपालन आसान होगा और नकदी प्रवाह में भी सुधार आएगा।

लेखक - रत्ना के, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, Deloitte India

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