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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: प्रेसिडेंसी डिविजन की 111 सीटें ही तय कर देंगी जीत-हार

West Bengal Chunav 2026: यह डिवीजन बंगाल की पूरी ताकत, आबादी, अर्थव्यवस्था और राजनीति का केंद्र है। यहां बंगाल की जनसांख्यिकीय भारी भरकम आबादी, आर्थिक मजबूती और राजनीतिक गतिविधियां इतनी तीव्रता से केंद्रित हैं कि बाकी चार डिवीजनों में इतनी शक्ति और प्रभाव नहीं है

Shubham Sharmaअपडेटेड Apr 17, 2026 पर 2:34 PM
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: प्रेसिडेंसी डिविजन की 111 सीटें ही तय कर देंगी जीत-हार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: प्रेसिडेंसी डिविजन की 111 सीटें ही तय कर देंगी जीत-हार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक पुरानी कहावत रही है- जो कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों को जीतता है, वही बंगाल पर राज करता है। 2026 के विधानसभा चुनावों में भी सभी निगाहें एक बार फिर इन इलाकों पर टिकी हैं। राज्य की कुल 294 सीटों में से करीब एक-तिहाई यानी 111 सीटें अकेले प्रेसिडेंसी डिविजन से आती हैं। पश्चिम बंगाल को पांच प्रशासनिक डिवीजनों में बांटा गया है– प्रेसिडेंसी, बर्धमान, मेदिनीपुर, मालदा और जलपाईगुड़ी।

इनमें से प्रेसिडेंसी डिवीजन सबसे खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें कोलकाता, हावड़ा, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं।

यह डिवीजन बंगाल की पूरी ताकत, आबादी, अर्थव्यवस्था और राजनीति का केंद्र है। यहां बंगाल की जनसांख्यिकीय भारी भरकम आबादी, आर्थिक मजबूती और राजनीतिक गतिविधियां इतनी तीव्रता से केंद्रित हैं कि बाकी चार डिवीजनों में इतनी शक्ति और प्रभाव नहीं है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि वो 'पावर सेंटर' है, जो तय करेगा कि राज्य की सत्ता की चाबी ममता बनर्जी के पास रहेगी या BJP पहली बार कोलकाता के 'लाल बाजार' तक पहुंचेगी।

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