
ओडिशा के संगीत प्रेमियों के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। 73 वर्षीय मशहूर ओडिया पार्श्व गायिका गीता पटनायक का रविवार शाम कटक के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके जाने से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। गीता पटनायक लंबे समय से संगीत की दुनिया में सक्रिय रही हैं और उनका योगदान ओडिया फिल्म और सुगम संगीत को अमर बनाता है। खबरों के मुताबिक, बीते गुरुवार को गीता पटनायक एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, जहां अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई।
उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनके ब्रेन स्ट्रोक ने उनकी जान ले ली। उनके निधन ने उनके फैंस, सहकर्मियों और संगीत प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है। गीता के मधुर स्वर और उनकी गायकी की विरासत हमेशा याद रखी जाएगी।
अचानक बिगड़ी तबियत
गीता पटनायक बीते गुरुवार, 12 फरवरी को एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। वहीं अचानक उनकी तबियत खराब हो गई। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई। रविवार शाम लगभग 6:18 बजे उन्होंने जीवन की अंतिम साँस ली।
पांच दशकों का संगीत सफर
गीता पटनायक ओडिया संगीत जगत का पांच दशकों से प्रमुख चेहरा थीं। उन्होंने फिल्म ‘जजाबर’ के गीत ‘फुर किना उडिगला बनी’ से घर-घर में पहचान बनाई। उनके और लोकप्रिय गीतों में ‘दानेई दास कहेर भाई’ और ‘बड़ा बेदरदी मो नाली पान राजा’ शामिल हैं।
शोक और संवेदनाएं
गीता के निधन पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे संगीत संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी शोक जताया।
अंतिम संस्कार
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, गीता का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। उनका अंतिम संस्कार 16 फरवरी को कटक के सतीचौरा श्मशान घाट पर होगा। ओडिया फिल्म और सुगम संगीत में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
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