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EAM Jaishankar: 'भारत स्वतंत्र रूप से लेगा फैसला...', रूसी तेल और अमेरिकी दबाव पर विदेश मंत्री जयशंकर का दोटूक जवाब

Russian Oil Imports India: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि तेल कंपनियों के फैसले पूरी तरह से व्यापारिक होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे यूरोप की कंपनियां उपलब्धता, लागत और जोखिम को देखती हैं, वैसे ही भारतीय कंपनियां भी अपने हित में फैसले लेती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया अब 2022 या 2023 में नहीं है। हालात बदल रहे है और हर देश अपनी सुविधा के अनुसार फैलसे ले रहा है

Edited By: Abhishek Guptaअपडेटेड Feb 15, 2026 पर 9:19 AM
EAM Jaishankar: 'भारत स्वतंत्र रूप से लेगा फैसला...', रूसी तेल और अमेरिकी दबाव पर विदेश मंत्री जयशंकर का दोटूक जवाब
अमेरिका द्वारा 'ट्रेड डील' को रूसी तेल की खरीद बंद करने से जोड़ने के दावों पर जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है

Jaishankar On Russian Oil: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में ऐतिहासिक ट्रेड डील हुई है। इस डील के बाद से ये दावा किया जा रहा है कि, भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस बात को लेकर देशभर में खूब सियासत चल रही है। इसी बीच म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मंच पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बड़ी बात कही है। अमेरिका द्वारा 'ट्रेड डील' को रूसी तेल की खरीद बंद करने से जोड़ने के दावों पर जयशंकर ने साफ कर दिया कि भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने वाशिंगटन को सीधा संकेत दिया कि भारत के ऊर्जा और विदेश नीति से जुड़े फैसले स्वतंत्र होंगे, न कि किसी बाहरी दबाव के अधीन।

भारत अपने फैसले खुद लेगा: EAM जयशंकर

तेल को लेकर इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दावा किया कि भारत ने नए व्यापार ढांचे के तहत 'रूसी तेल' न खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश में भी यह कहा गया कि भारत रूसी तेल के बजाय अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाएगा। इन दावों पर पलटवार करते हुए जयशंकर ने जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल की मौजूदगी में कहा, 'रणनीतिक स्वायत्तता हमारे इतिहास और विकास का हिस्सा है। क्या मैं स्वतंत्र सोच रखूंगा और अपने फैसले खुद लूंगा? क्या मैं ऐसे चुनाव करूंगा जो शायद आपकी या किसी और की सोच से मेल न खाएं? हां, ऐसा बिल्कुल हो सकता है।'

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि तेल कंपनियों के फैसले पूरी तरह से व्यापारिक होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे यूरोप की कंपनियां उपलब्धता, लागत और जोखिम को देखती हैं, वैसे ही भारतीय कंपनियां भी अपने हित में फैसले लेती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया अब 2022 या 2023 में नहीं है। हालात बदल रहे है और हर देश अपनी सुविधा के अनुसार फैलसे ले रहा है।

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