राहुल गांधी की होगी जांच! दोहरी नागरिकता के आरोप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP सरकार को दिया आदेश

याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी के फैसले को चुनौती दी थी। उस अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने कहा था कि नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने का अधिकार उसके पास नहीं है

अपडेटेड Apr 17, 2026 पर 5:32 PM
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राहुल गांधी को झटका! दोहरी नागरिकता का आरोप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) रखने का आरोप लगा है। इस आरोप की जांच होनी चाहिए, यह कहते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि या तो खुद जांच करे या फिर इस मामले को किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दे। यह आदेश आज BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष MP/MLA अदालत के 28 जनवरी के फैसले को चुनौती दी थी। उस अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने कहा था कि नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर फैसला करने का अधिकार उसके पास नहीं है।

याचिकाकर्ता का आरोप


कर्नाटक के रहने वाले याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज कराने और गहन जांच कराने की मांग की है।

शुरू में यह शिकायत रायबरेली की विशेष MP/MLA अदालत में दायर की गई थी। 17 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने मामले को लखनऊ ट्रांसफर कर दिया। जब लखनऊ की अदालत ने भी याचिका खारिज कर दी, तब याचिकाकर्ता हाईकोर्ट पहुंच गए।

कब और कैसे शुरू हुआ ये विवाद?

राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर विवाद काफी पुराना है और समय-समय पर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनता रहा है। इस विवाद की मुख्य वजह ब्रिटिश नागरिकता (British Citizenship) के आरोप हैं।

इस विवाद की जड़ में ब्रिटेन (UK) की एक कंपनी है, जिसका नाम Backops Limited था। यह कंपनी 2003 में लंदन में रजिस्टर्ड की गई थी। राहुल गांधी इसके डायरेक्टर और सचिव थे।

2015 में BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि इस कंपनी की ओर से 2005 और 2006 में दाखिल किए गए सालाना रिटर्न में राहुल गांधी ने अपनी नागरिकता 'ब्रिटिश' बताई थी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, अगर कोई भारतीय नागरिक अपनी इच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अपना आप खत्म हो जाती है।

कब-कब उठा ये मामला?

2015-2016 में सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राहुल गांधी की नागरिकता रद्द करने की मांग की। संसद की एथिक्स कमेटी ने भी इस पर राहुल गांधी से जवाब मांगा था।

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्रालय (MHA) ने राहुल गांधी को एक नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर इस शिकायत पर अपना 'तथ्यात्मक रुख' स्पष्ट करने को कहा।

2019 में ही सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को चुनाव लड़ने से रोकने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि "सिर्फ इसलिए कि किसी कंपनी ने उन्हें ब्रिटिश लिखा, इसका मतलब यह नहीं कि वे ब्रिटिश नागरिक हो गए।"

राहुल गांधी और कांग्रेस का पक्ष

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को हमेशा सिरे से खारिज किया है।

कांग्रेस ने दलील दी कि कंपनी के दस्तावेजों में नागरिकता को ब्रिटिश लिखना केवल एक 'टाइपिंग की एरर' था। पार्टी ने कंपनी के 'सर्टिफिकेट ऑफ इनकॉर्पोरेशन' पेश किए, जिसमें राहुल गांधी की नागरिकता 'भारतीय' (Indian) दर्ज थी।

राहुल गांधी ने इन आरोपों को अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया है। एक बार उन्होंने सार्वजनिक तौर पर चुनौती देते हुए कहा था,"मेरे पास दिखाने के लिए कोई दूसरा पासपोर्ट नहीं है। अगर आरोप सही हैं, तो मुझे जेल में डाल दें।"

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