Get App

Sheesh Mahal Row: CM रेखा गुप्ता ने विधानसभा में पेश की केजरीवाल के सरकारी बंगले पर खर्च की CAG रिपोर्ट

Sheesh Mahal Row: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास ‘शीश महल’ में मरम्मत और निर्माण कार्य की लागत 300 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ गई। केजरीवाल के इस बंगले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) 'शीश महल' बताती है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Mar 24, 2026 पर 4:43 PM
Sheesh Mahal Row: CM रेखा गुप्ता ने विधानसभा में पेश की केजरीवाल के सरकारी बंगले पर खर्च की CAG रिपोर्ट
Sheesh Mahal Row: दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले को लेकर फिर नया विवाद शुरू हो गया है

Sheesh Mahal Row: दिल्ली विधानसभा में सोमवार (23 मार्च) को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्व CM अरविंद केजरीवाल के तत्कालीन आधिकारिक निवास, 6 फ्लैगस्टाफ रोड के रेनोवेशन में आए खर्च पर CAG की 2022 की एक रिपोर्ट पेश की। इस काम में 33.66 करोड़ रुपये का खर्च हुआ था। CAG रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि ये खर्च अनुमानित लागत से 342 प्रतिशत ज्यादा था। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 33.66 करोड़ रुपये में से 18.88 करोड़ रुपये महंगी, कलात्मक और सजावटी सामानों पर खर्च किए गए थे।

फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगला को भारतीय जनता पार्टी (BJP) 'शीश महल' करार देते हुए केजरीवाल और उनकी सरकार पर हमले करती थी। इस आवास में केजरीवाल 2015 से 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में रहे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बंगले में अतिरिक्त कमरे उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां स्थित कैंप कार्यालय और स्टाफ ब्लॉक में किए गए बदलावों में कई अनियमितताएं पाई गई।

कैग रिपोर्ट में कहा गया कि 9.34 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति और व्यय की मंजूरी काम पूरा होने के दो महीने से अधिक समय बाद दी गई। इससे बिना किसी पूर्व अनुमति के ही देनदारी उत्पन्न हो गई। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट में पाया गया कि स्टाफ ब्लॉक और कैंप कार्यालय के निर्माण के लिए स्वीकृत 19.87 करोड़ रुपये में से धनराशि को अन्य कार्यों में लगा दिया गया।

जबकि स्टाफ ब्लॉक का निर्माण नहीं हुआ। उस धनराशि से सहायकों के लिए सात क्वार्टर एक ऐसे स्थान पर बनाए गए जो मूल कार्य से संबंधित नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया कि कैंप ऑफिस का स्वरूप स्थायी से अर्द्ध-स्थायी ढांचा (SPS) में बदल दिया गया था। इस वजह से कोष खत्म हो जाने के कारण कैंप ऑफिस की केवल कच्ची संरचना ही पूरी हो सकी। जून 2023 में पीडब्ल्यूडी द्वारा काम बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 31 मार्च, 2022 की तारीख वाली यह ऑडिट रिपोर्ट सोमवार को दिल्ली विधानसभा में पेश की गई।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें