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'ममता दीदी से बैर नहीं, अभिषेक बनर्जी की खैर नहीं', TMC में बगावत का यही है सीधा सा मतलब!

TMC vs TMC बागी विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर जो प्रस्ताव भेजा गया, वह सही तरीके से पारित नहीं हुआ था और कुछ हस्ताक्षर भी कथित तौर पर फर्जी थे। हालांकि हैरानी की बात यह है कि बागी नेताओं में से किसी ने भी अब तक ममता बनर्जी पर सीधा हमला नहीं बोला है।

Shubham Sharmaअपडेटेड Jun 03, 2026 पर 7:49 PM
'ममता दीदी से बैर नहीं, अभिषेक बनर्जी की खैर नहीं', TMC में बगावत का यही है सीधा सा मतलब!
TMC vs TMC: 'ममता दीदी से बैर नहीं, अभिषेक बनर्जी की खैर नहीं', TMC में बगावत का यही है सीधा सा मतलब!

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही बगावत अब और गहरी होती दिख रही है। पार्टी से निकाले गए विधायक रितब्रत बनर्जी को कई बागी विधायक विपक्ष का नेता (LoP) बनाने के समर्थन में आ गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट से भी की जा रही है। लेकिन अगर पूरे मामले को ध्यान से देखें तो यह लड़ाई ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और अधिकार को लेकर ज्यादा नजर आती है।

बागी विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर जो प्रस्ताव भेजा गया, वह सही तरीके से पारित नहीं हुआ था और कुछ हस्ताक्षर भी कथित तौर पर फर्जी थे।

हालांकि हैरानी की बात यह है कि बागी नेताओं में से किसी ने भी अब तक ममता बनर्जी पर सीधा हमला नहीं बोला है।

रितब्रत बनर्जी ने पार्टी से निकाले जाने के बाद भी कहा कि वह अब भी ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं और उन्हें अपना नेता मानते हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनकी लड़ाई ममता से नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर फैसले लेने के तरीके से है।

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