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Rajasthan Election 2023 : 'काम किया दिल से, कांग्रेस फिर से' बनाम 'नहीं सहेगा राजस्थान', किस नारे पर जनता को भरोसा?

Rajasthan Election 2023 : 1993 से अब तक राजस्थान में किसी मुख्यमंत्री के लगातार दो बार सरकार चलाने का रिकॉर्ड नहीं है। 1993 में BJP सिर्फ 95 सीटे जीत पाई थी। 2003 में उसने 120 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2013 में इसने 163 सीटे जीती थी। 1998 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 153 सीटों पर जीत हासिल की थी। तब पहली बार गहलोत राज्य के मुख्यमंत्री बने थे

Translated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Oct 17, 2023 पर 6:54 PM
Rajasthan Election 2023 : 'काम किया दिल से, कांग्रेस फिर से' बनाम 'नहीं सहेगा राजस्थान', किस नारे पर जनता को भरोसा?
इस बार चुनावों में कोई खास मुद्दा नहीं दिख रहा है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे पारंपरिक मुद्दे इस चुनाव में भी दिख रहे हैं। हालांकि, भाजपा लगातार राज्य की विधि-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती रही है। उसने गहलोत पर महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षा देने में नाकाम रहने का भी आरोप लगाया है।

अमिताभ तिवारी

'काम किया दिल से, कांग्रेस फिर से' यह कांग्रेस (Congress) का चुनावी नारा है। भाजपा (BJP) ने नारा दिया है-'नहीं सहेगा राजस्थान'। किस नारे पर जनता को भरोसा है इसका पता 3 दिसंबर को चलेगा। तब तक आपको दोनों दलों के दावों को ध्यान से सुनना होगा। इससे हो सकता है कि 3 दिसंबर से पहले ही आपको पता चल जाए कि जनता को कौन सा नारा पसंद आ रहा है।

क्या 1993 से चली आ रही परंपरा टूटेगी?

अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) क्या इस बार सत्ता में लौटने में सफल होंगे ? 1993 से अब तक राजस्थान में किसी मुख्यमंत्री के लगातार दो बार सरकार चलाने का रिकॉर्ड नहीं है। 1993 में BJP सिर्फ 95 सीटे जीत पाई थी। 2003 में उसने 120 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2013 में इसने 163 सीटे जीती थी। 1998 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 153 सीटों पर जीत हासिल की थी। तब पहली बार गहलोत राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। 2008 और 2018 में कांग्रेस ने इंडिपेंडेंट और BSP के समर्थन से सरकार बनाई थी। अगर अब तक देखे गए ट्रेंड की बात करें तो इस बार भाजपा को राजस्थान में सरकार बनानी चाहिए। अगर वोट शेयर की बात करें तो BJP और Congress का करीब एक तरह का सपोर्ट लेवल है। यही वजह है कि पिछले कई सालों में दोनों दलों में कांटे का मुकाबले दिखता रहा है। RLP, NPP, BTP जैसी छोटी पार्टियां और स्वतंत्र विधायक राजस्थान की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इनका वोट शेयर 17 से 23 फीसदी के बीच रहा है।

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