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Budget 2022: केपीएमजी को निर्मला सीतारमण से बजट में क्या हैं उम्मीदें?

वित्त मंत्री ऐसे वक्त बजट पेश करने जा रही है, जब अर्थव्यवस्था रिकवरी के रास्ते पर है। हालांकि, कोरोना की महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में वित्त मंत्री का फोकस ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों के साथ ही मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (Medical Infrastructure) को उन्नत बनाने पर हो सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 27, 2022 पर 6:29 PM
Budget 2022: केपीएमजी को निर्मला सीतारमण से बजट में क्या हैं उम्मीदें?
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह उनका चौथा बजट होगा। पहली बार उन्होंने साल 2019 में बजट पेश किया था।

यूनियन बजट 2022 (Union Budget 2022) पेश होने की तारीख नजदीक आ गई है। दुनिया की सबसे बड़ी अकाउंटिंग फर्मों में से एक केपीएमजी (KPMG) का मानना है कि इस बार इनकम टैक्स (Income Tax Slab) स्लैब को तर्कसंगत बनाने, विदेश में कंपनियों की लिस्टिंग को आसान बनाने और टीडीसी/टीसीएस के प्रावधानों को आसान बनाने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को ध्यान देना चाहिए। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह उनका चौथा बजट होगा। पहली बार उन्होंने साल 2019 में बजट पेश किया था।

केपीएमजी (KPMG) ने उम्मीद जताई है कि इस बार बजट में कंपनियों की तरफ से कर्मचारियों और उनके परिवार को दिए गए फायदों पर टैक्स के नियमों में स्पष्टीकरण आना चाहिए। चूंकि, कोरोना के इलाज पर बहुत पैसे खर्च हुए हैं, इसलिए इंप्लॉयीज को खुद और परिवार के सदस्यों पर किए गए ऐसे खर्चों पर टैक्स में अलग से डिडक्शन मिलना चाहिए। इस अकाउंटिंग फर्म का मानना है कि इंडियन कंपनियों की विदेश में लिस्टिंग की प्रकिया को आसान बनाने की जरूरत है। इस तरह की लिस्टिंग पर टैक्स एग्जेम्प्शन भी मिलना चाहिए।

उसने कहा कि विदेशी कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax) रेट को कम करने की जरूरत है। इस भारतीय कंपनियों के लिए लागू दरों के बराबर रखना ठीक रहेगा। उसने टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) के नियमों को भी आसान बनाना होगा। डेरिवेटिव सहित सभी तरह की सिक्योरिटीज को टीसीएस और टीडीएस के दायरे से बाहर करना चाहिए। केपीएमजी ने कहा है कि सरकार को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत लाने की जरूरत है।

वित्त मंत्री ऐसे वक्त बजट पेश करने जा रही है, जब अर्थव्यवस्था रिकवरी के रास्ते पर है। हालांकि, कोरोना की महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में वित्त मंत्री का फोकस ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों के साथ ही मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (Medical Infrastructure) को उन्नत बनाने पर हो सकता है। बढ़ते फिस्कल डेफिसिट को काबू में लाने के लिए भी सरकार को रोडमैप पेश करना होगा। पिछले दो साल से जारी कोरोना की महामारी ने सरकार का फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) बहुत बढ़ा दिया है।

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