Budget 2023 : यूनियन बजट पेश होने में अब कुछ ही घंटे बाकी हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार, 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। ऐसे में वह ऐसे भी कुछ ऐलान कर सकती हैं, जिनसे स्टॉक मार्केट को एक दिशा मिल सकती है। इसीलिए, स्टॉक मार्केट के इनवेस्टर्स बेसब्री से बजट का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है बजट में कुछ ऐसे ऐलान होने सकते हैं, जिससे उनका रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट और प्रॉफिट बढ़ सकता है। अगर बजट से शेयर बाजार को कुछ सपोर्ट मिलता है तो अगले साल बाजार नई ऊंचाइयां छू सकता है।
एलटीसीजी टैक्स की लिमिट में बढ़ोतरी
LTCG Tax : लिस्टेड शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स की टैक्सेशन स्कीम में 2018 में बदलाव किया गया था, जब वर्तमान में एक लाख रुपये तक की धनराशि पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट है। इससे ज्यादा किसी भी धनराशि पर 10 फीसदी की दर से टैक्स देना होता है। इनवेस्टर्स इस लिमिट में बदलाव चाहते हैं।
Tax on dividends : 2020 से डिविडेंड से होने वाली अर्निंग्स लागू टैक्स स्लैब्स के आधार पर “अन्य स्रोतों से आय” के मद में कर योग्य है। हालांकि, कंपनी द्वारा अपनी इनकम पर पहले ही टैक्स जमा किए जाने के बावजूद इनवेस्टर्स को यह टैक्स देना होता है। निवेशकों को मिलने वाला पार्टनरशिप फर्मों या एलएलपी से मिलने वाले प्रॉफिट का हिस्सा कर मुक्त होता है, क्योंकि फर्म या एलएलपी उन पर कर का भुगतान करते हैं। डिविडेंड पर टैक्स में कमी की लगातार मांग हो रही है, क्योंकि कंपनी पहले ही अपने प्रॉफिट पर टैक्स चुका देती है।
फ्यूचर एंड ऑप्शन और डे ट्रेडर्स के लिए सरल कंप्लायंस
डिलिवरी बेस्ड ट्रेड्स से जुड़े निवेश और एफएंडओ या डे ट्रेडर्स पर इनकम टैक्स अलग-अलग तरह से लगता है। डिलिवरी बेस्ड ट्रांजेक्शंस में किए गए निवेश की तुलना में डे ट्रेडर्स द्वारा की गई कमाई को अटकलबाजी माना जाता है और एफएंडओ सेगमेंट को सामान्य बिजनेस माना जाता है। दोनों परिदृश्य में, प्रॉफिट टैक्सपेयर्स की गणना में “कारोबार या प्रोफेशन से लाभ और फायदे” के मद में कर योग्य है। साथ ही, यह फ्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए लागू होने वाले विभिन्न मापदंडों के साथ टैक्स ऑडिट आवश्यकताओं के अधीन भी हो सकता है। अधिकांश टैक्सपेयर्स को यह भ्रामक, जटिल और कंप्लायंस करने में कठिन लगता है। टर्नओवर आधारित टैक्सेशन की एक सरल प्रणाली अधिक स्पष्टता ला सकती है और सरकार के रेवेन्यू को भी बढ़ा सकती है।
महंगाई और फिस्कल डेफिसिट पर नियंत्रण
Inflation and Fiscal Deficit : निवेशक उत्सुकता से उन कदमों की उम्मीद कर रहे हैं जिनसे सरकार को महंगाई को काबू में करने और राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद मिले, जो लगातार बढ़ रहे हैं। राजकोषीय मजबूती के चलते बाजार आने वाले वर्ष में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है।
इनवेस्टर्स नई नौकरियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने और जीएसटी में बदलाव से संबंधित अन्य ऐलानों की भी उम्मीद करेंगे। इससे स्टॉक मार्केट्स को छोटी अवधि और लंबी अवधि दोनों में फायदा मिल सकता है।
(Abhishek Aneja पेशे से सीए हैं)