बजट 2023 : फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने एक तीर से साधे तीन निशाने

Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर ने एक तरफ इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने पर फोकस किया है तो दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को राहत देने की भी कोशिश की है। PLI स्कीम के लिए आवंटन बढ़ाने से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा

अपडेटेड Feb 02, 2023 पर 3:42 PM
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बजट 2023: सरकार ने अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले आखिरी पूर्ण बजट में ज्यादा लोकलुभावन उपायों के ऐलान से परहेज किया है। सरकार का फोकस ऐसे खर्चों पर है, जिससे ज्यादा असर पड़ता है।

निलेश शाह

Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बाहुबली बजट पेश किया है। इसमें एक तीर से उन्होंने तीन निशाने साधे हैं। उन्होंने अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 2023-24 के लिए 10 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया है। यह फाइनेंशियल ईयर 2015-16 के एलोकेशन का करीब चार गुना है। यह इकोनॉमी की अच्छी ग्रोथ बनाए रखने में मदद करेगा।

वित्तमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए भी राहत के इंतजाम किए हैं। उन्होंने अगले एक साल के लिए अंत्योदय और प्राथमिकता वाले परिवारों के लिए मुफ्त खाद्यान्न योजना लागू करने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लिए भी आवंटन बढ़ाया गया है। जल जीवन मिशन के लिए आवंटन बढ़ाया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को फायदा होगा।


ज्यादा लोकलुभावन ऐलान नहीं

सरकार ने अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले आखिरी पूर्ण बजट में ज्यादा लोकलुभावन उपायों के ऐलान से परहेज किया है। सरकार का फोकस ऐसे खर्चों पर है, जिससे ज्यादा असर पड़ता है। रेवेन्यू का अनुमान ज्यादा नहीं रखा गया है। इसे हासिल किया जा सकता है। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर को 35 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो नियंत्रण में लगता है। इसके लिए फूड, फर्टिलाइजर्स और ऑयल सब्सिडी में 28 फीसदी तक की कमी की गई है।

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अगले फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 5.9 फीसदी रखा गया है। इस फाइनेंशियल ईयर में यह 6.4 फीसदी था। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने पर फोकस बनाए रखा है। इससे इनफ्लेशन बढ़ने का रिस्क कम होगा।

फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा है कि पिछले बजटों और इस बजट का फोकस लंबी अवधि में ग्रोथ बढ़ाने वाले स्तंभों की मजबूती पर है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश से कॉस्ट में कमी आएगी और भारतीय कंपनियां ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगी। PLI स्कीम के लिए आवंटन काफी बढ़ाया गया है। इससे मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की कोशिशों को मजबूती मिलती रहेगी।

इज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने के लिए 39,000 से ज्यादा कंप्लायंसेज खत्म किए गए हैं। 3,400 से ज्यादा लीगल प्रोविजंस को डिक्रिमनलाइज किया गया है। दूरदराज के इलाकों में क्वालिटी एजुकेशन के लिए एलोकेशन बढ़ाने और शिक्षकों की ट्रेनिंग से वर्कफोर्स की स्किल बढ़ेगी।

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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेंटर ऑफ एक्सैलेंस

हमें मीडियम टर्म में कई सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ मजबूत बने रहने की उम्मीद है। सरकार ने इलेट्रॉनिक्स मैन्युफैक्टरिंग को कस्टम ड्यूटी में कमी कर अपना सपोर्ट बनाए रखा है। लिथियिम-आयन सेल्स पर रियायती ड्यूटी को और एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। इससे इलोक्ट्रि व्हीकल्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार की नजरें फ्यूचर पर हैं। इसके लिए एनर्जी ट्रांजिशन के लिए 35,000 करोड़ रुपये के कैपिटल इनवेस्टमेंट का प्रस्ताव है। इसमें नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शामिल है। 'मेक AI इन इंडिया और मेक AI वर्क फॉर इंडिया' के लिए तीन सेंटर ऑफ एक्सैलेंस बनाने का प्रस्ताव है। सेमीकंडक्टर फैब्स बनाने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का एलोकेशन किया गया है।

पर्नसल इनकम टैक्स को आसान बनाने और कंप्लायंस में सुधार लाने की कोशिश की गई है। न्यू टैक्स रीजीम में टैक्स रेट्स घटाए गए हैं। रिबेट को 5 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। सबसे ज्यादा सरचार्ज को भी 37 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है। टैक्स नियमों में बदलाव से टैक्सपेयर के हाथ में अतिरिक्त 35,000 रुपये तक की बचत होगी। सरकार ने शेयरों में निवेश से जुड़े लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है।

एग्जिट टैक्स के उपाय नहीं

इस बजट में एक चीज जो नदारद है, वह है एग्जिट टैक्स। 20 लाख डॉलर से ज्यादा एसेट्स वाले अमेरिकी नागरिकों को अपनी सिटीजनशिप सरेंडर करने से पहले अपने एसेट्स पर अनरियलाइज्ड गेंस पर टैक्स चुकाना पड़ता है। पिछले 8 साल में 17 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। इंडियंस के देश छोड़ने और टैक्स अवयायडेंस में कमी लाने के लिए एक्जिट टैक्स लगाया जाना चाहिए था।

हालांकि, यह बजट ग्रोथ आधारित है, लेकिन यह मार्केट में दम नहीं भर सकता। मार्केट की तेजी वैल्यूएशन और कैपिटल फ्लो पर निर्भर करेगी। हालिया गिरावट के बाद इंडियन मार्केट में दूसरे देशों के मुकाबले प्रीमियम पर कारोबार हो रहा है। इस बात की उम्मीद कम है कि विदेशी निवेशक इंडियन मार्केट के लिए एलोकेशन बढ़ाएंगे। मौजूदा लेवल से अच्छा रिटर्न कमाने के लिए इनवेस्टर्स को थोड़ा धैर्य दिखाना होगा।

(निलेश शाह कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के ग्रुप प्रेसिडेंट एंव एमडी हैं)

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