Union budget 2023 : सरकार पीएसयू बैंकों की वित्तीय सेहत को लेकर पूरी जोश में है। यही वजह है कि उसने बैंकों के रिकैपिटलाइजेशन से जुड़ा कोई ऐलान नहीं किया। इसके उलट सरकार RBI और पीएसयू बैंकों से वित्त वर्ष के दौरान डिविडेंड के रूप में 48,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद कर रही है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा 1 फरवरी को संसद में पेश यूनियन बजट (union budget 2023) से यह बात सामने आई है। सरकार ने केंद्रीय बैंक और पब्लिक सेक्टर के बैंकों से मिलने वाला डिविडेंड 17.3 फीसदी बढ़कर 48,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जाहिर किया है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए रिवाइज इस्टीमेट 40,953.33 करोड़ रुपये है।
आरबीआई ने क्यों कम दिया डिविडेंड
हालांकि, चालू वित्त वर्ष के लिए रिवाइज एस्टीमेट 44.6 फीसदी कम है, जबकि बीते साल के बजट में 73,948 करोड़ रुपये का अनुमान जाहिर किया गया था। इसमें कमी की मुख्य वजह आरबीआई रहा, जिसने मई 2022 में सिर्फ 30,307 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था।
दरअसल, आरबीआई को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश पर ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी के चलते झटका लगा था और केंद्रीय बैंक को कंटीजेंसी फंड (Contingency Fund) के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये का प्रोविजन करना पड़ा, जो बीते साल की तुलना में 5 गुना ज्यादा था।
सरकार के साथ प्रॉफिट साझा करता है आरबीआई
आरबीआई का Contingency Fund सिक्योरिटीज की वैल्यू में कमजोरी, मोनेट्री और एक्सचेंज रेट पॉलिसी ऑपरेशन से जुड़े रिस्क और व्यवस्थागत जोखिम आदि सहित आकस्मिक स्थितियों के लिए रखा जाता है।
RBI अपनी ड्यूटीज के जरिये रेवेन्यू अर्जित करता है। अपने खर्चों को पूरा करने के बाद आरबीआई को डिविडेंड के रूप में केंद्र सरकार के साथ प्रॉफिट साझा करना होता है।
आरबीआई संभवतः अपने अकाउंट्स को अंतिम रूप मिलने के बाद मई, 2023 में केंद्र सरकार को डिविडेंड देगा। सरकार के लिए पिछले कई साल से केंद्रीय बैंक का डिविडेंड रेवेन्यू का अहम स्रोत बना हुआ है।