Union Budget 2023: अगले यूनियन बजट में अगर सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर फोकस बढ़ाती है तो इससे रुपये को सपोर्ट मिलेगा। रायटर्स के पोल से यह जानकारी मिली है। इस पोल में हिस्सा लेने वाले एनालिस्ट्स का मानना है कि अगले 12 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिलेगी। इससे पिछले साल आई गिरावट के करीब 20 फीसदी हिस्से की भरपाई हो जाएगी। पिछले साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई थी। 2013 के बाद यह रुपये का सबसे खराब प्रदर्शन था। इसकी वजह उभरते बाजारों में बिकवाली और बढ़ता फिस्कल और करेंट अकाउंट डेफिसिट था। ऑयल के बढ़ते प्राइसेज ने मुश्किल और बढ़ा दी। ऑयल के आयात पर इंडिया का सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है।
रुपये में मजबूती के लिए जरूरी है सरकार की अच्छी वित्तीय सेहत
रायटर्स के पोल में हिस्सा लेने वाले 17 में से 11 एनालिस्ट्स का कहना था कि बजट में फिस्कल डेफिसिट पर सरकार का फोकस रुपये की मजबूती के लिहाज से फायदेमंद होगा। इससे निकट भविष्य में रुपये में मजबूती देखने को मिल सकती है। छह एनालिस्ट्स ने अगले यूनियन बजट में ग्रोथ पर फोकस रहने का अनुमान जताया। वेल्स फार्गो के फॉरने करेंसी स्ट्रेटेजिस्ट और इंटरनेशनल इकोनॉमिस्ट Brenden McKenna ने कहा कि अगर बजट में हमें वित्तीय स्थिति को ठीक करने की सरकार की जिम्मेदारी की झलक मिलती है तो इसका मतलब है कि सरकार इस जिम्मेदारी को पूरी करेगी। इससे ऐसा माहौल बनेगा, जिसमें इंडियन रूपी का प्रदर्शन हमारे अनुमान के मुकाबले बेहतर रह सकता है।
बढ़ता फिस्कल डेफिसिट सरकार की खर्च करने की क्षमता पर असर डालेगा
रायटर्स के एक दूसरे पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने भी आने वाले बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस रहने की उम्मीद जताई। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले यह केंद्र की मोदी सरकार का आखिरी बजट होगा। इकोनॉमिक स्लोडाउन खर्च करने की सरकार की क्षमता को सीमित कर देगा। पिछले दो-तीन सालों में सरकार ने अपना खर्च बहुत बढ़ाया था। फिस्कल डेफिसिट बढ़ने की यह सबसे बड़ी वजह है।
पिछला दशक रुपये के लिए अच्छ नहीं रहा
पिछले दशक में 2017 को छोड़ करीब हर साल डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई है। इस साल इसमें मजबूती आने की उम्मीद है। हालांकि, रायटर्स के पोल में शामिल किसी एनालिस्ट ने रुपये के फिर से डॉलर के मुकाबले 75 का स्तर हासिल करने की उम्मीद नहीं जताई। साल 2022 की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया इसी स्तर पर था।
रुपये का फिर से 75 का स्तर हासिल करना मुश्किल
एचडीएफसी बैंक की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा, "हम एक न्यू नॉर्मल स्थिति में आ गए हैं, जो 80 के ऊपर का लेवल है। अमेरिका में बड़ी मंदी आने की स्थिति में अगर फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट्स 6-6.5 फीसदी तक बढ़ा देता है और कमोडिटी की कीमतें बढ़ जाती हैं तो रुपये 84-85 के लेवल को पार कर सकता है।" 2022 के अंतिम तिमाही में ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज और अमेरिकी डॉलर में गिरावट देखने को मिली, लेकिन रुपया इसका फायदा उठाने में नाकाम रहा।