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CBI ने मेघा इंजीनियरिंग और स्टील मंत्रालय के 8 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की FIR, ₹315 करोड़ के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का आरोप

केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने हैदराबाद मुख्यालय वाली मेघा इंजीनियरिंग के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में FIR दर्ज की है। मेघा इंजीनियरिंग पर आरोप है कि इसने 315 करोड़ रुपये के एक NISP प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत दी। FIR में एनआईएसपी (NISP) और एनएमडीसी (NMDC) के 8 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 13, 2024 पर 7:14 PM
CBI ने मेघा इंजीनियरिंग और स्टील मंत्रालय के 8 अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की FIR, ₹315 करोड़ के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का आरोप
Megha Engineering ने 966 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने हैदराबाद मुख्यालय वाली मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Megha Engineering and Infrastructure Ltd) के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। मेघा इंजीनियरिंग पर आरोप है कि इसने 315 करोड़ रुपये के एक NISP प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत दी। FIR में स्टील मंत्रालय के तहत आने वाले एनआईएसपी (NISP) और एनएमडीसी (NMDC) के 8 अधिकारियों और मेकॉन (MECON) के 2 अधिकारियों को भी कथित तौर पर रिश्वत लेने के लिए आरोपी बनाया गया है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जगदलपुर स्थित इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट से जुड़े कार्यों के लिए मेघा इंजीनियरिंग ने 174 करोड़ रुपये के बिलों को मंजूर कराने के लिए लगभग 78 लाख रुपये की कथित रिश्वत दी।

बता दें कि मेघा इंजीनियरिंग का नाम हाल ही में इलेक्टोरल बॉन्ड के खरीदारों में शामिल होने के चलते भी सुर्खियों में था। हैदराबाद मुख्यालय वाली इस कंपनी ने 966 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे और वह इन बॉन्ड की दूसरी सबसे बड़ी खरीदार है। वहीं इसके सहयोगी कंपनी 'वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन' के आंकड़े को भी शामिल कर लें, तो इसने कुल करीब 1,186 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे थे।

चुनाव आयोग की ओर से 21 मार्च को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मेघा इंजीनियरिंग इलेक्टोरल बॉन्ड की दूसरी सबसे बड़ी खरीदार थी और इसने बीजेपी को करीब 586 करोड़ रुपये की सबसे अधिक राशि का दान दिया था। इसके अलावा कंपनी ने बीआरएस (BRS) को 195 करोड़ रुपये, डीएमके (DMK) को 85 करोड़ रुपये और वाईएसआरसीपी (YSRCP) को 37 करोड़ रुपये का दान दिया। टीडीपी (TDP) को कंपनी से करीब 25 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस को 17 करोड़ रुपये मिले।

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