इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू मार्केट में तेज बिकवाली रही जिसके चलते निवेशकों की पूंजी करीब 6.18 लाख करोड़ रुपये घट गई। घरेलू इक्विटी मार्केट में आज 16 सितंबर का कारोबार बंद होने पर इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) में करीब दो फीसदी की गिरावट रही। सेंसेक्स की बात करें तो यह 1093 प्वाइंट गिरकर 58,841 पर और निफ्टी 347 अंक फिसलकर 17531 पर बंद हुआ है।
तेज बिकवली के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की बाजार पूंजी (मार्केट कैप) 6.19 लाख करोड़ रुपये घटकर 279.69 लाख करोड़ रुपये रह गई। बाजार को नीचे लाने के पीछे कई कारण हैं जिनके बारे में नीचे डिटेल्स दी जा रही है।
वैश्विक स्तर पर बाजारों में गिरावट
दुनिया भर के बाजारों में गिरावट का रूझान बना हुआ है जिसके चलते घरेलू मार्केट में निगेटिव सेंटिमेंट बना। अमेरिकी और यूरोपीय मार्केट में तेज बिकवाली रही। वहीं एशियाई इंडेक्स की बात करें तो जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, हांगकांग के हैंगसैंग, ताइवान के ताइवान वेटेड, चीन के शंघाई कंपोजिट और सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम्स रेड जोन में हैं।
दरों में बढ़ोतरी की आशंका
अगले हफ्ते अमेरिकी फेड की नीतियों का ऐलान हो सकता है। अगस्त में महंगाई दर में अनुमान से अधिक उछाल के चलते आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार तीसरी बार दरें बढ़ा सकता है। इसके चलते दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। विश्व बैंक और आईएमएफ ने वैश्विक मंदी की भी आशंका जताई है जिसके चलते बिकवाली का दौर चल रहा है।
हैवीवेट स्टॉक में बिकवाली से दबाव
सेंसेक्स पर सबसे अधिक वेटेज रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस और एचडीएफसी का है। इन सभी शेयरों में आज बिकवाली रही और सिर्फ इंडसइंड बैंक ही बढ़त के साथ बंद हुआ है। निफ्टी पर भी सबसे अधिक वेटेज इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस का है और इनमें बिकवाली के चलते निफ्टी भी गिरा है। आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, ऑटो और रियल्टी शेयरों में बिकवाली से मार्केट पर दबाव बना रहा। सभी सेक्टर्स के इंडेक्स रेड जोन में बंद हुए हैं।
आज कारोबार की शुरुआत में रुपया अमेरिकी डॉलर की तुलना में 11 पैसा कमजोर होकर 79.82 रुपये के भाव पर फिसल गया। डॉलर की मजबूती और घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोरी के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा
महंगाई के बढ़ते दबाव और सुस्ती की आशंका के चलते विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में आर्थिक मंदी की चेतावनी दी है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के देशों में नीतिगत सख्ती की जा रही है जो महंगाई पर काबू पाने में असफल साबित हो रही है और इस वजह से अगले साल वैश्विक इकॉनमी में मंदी आने की आशंका दिख रही है।