गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) ने ऑनलाइन लोन देने वाले मोबाइल ऐप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गूगल के इस कदम से नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के लिए कॉम्पिटीशन काफी बढ़ सकता है। Google ने हाल ही में कहा था कि उसने साल 2022 में करीब 3,500 से अधिक पर्सनल लोन देने वाले ऐप के खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में इन ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हमेशा के लिए हटाना भी शामिल है। गूगल ने डिजिटल लोन देने वाली ऐप्स के लिए अपने गाइडलाइंस में भी बदलाव किया है, जिससे ये ऐप यूजर्स के पर्सनल और दूसरे संवेदनशील जानकारी तक नहीं पहुंच सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी स्थिति में ये डिजिटल लोन देने वाले फर्म RBI के पास नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) के लाइसेंस के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (FACE) के चेयरमैन राम रस्तोगी ने कहा, 'पहले से अधिक डिजिटल लेंडर्स, NBFC लाइसेंस के लिए आरबीआई के पास जा सकते हैं क्योंकि गूगल प्ले स्टोर पर लेंडिंग ऐप के लिए नियम आगे और सख्त होने की उम्मीद है।'
यू ग्रो कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी शचींद्र नाथ ने कहा, 'गूगल की कार्रवाई के बाद कुछ इस सेगमेंट में कारोबार करने को लेकर कुछ गंभीर कंपनियां, अब NBFC लाइसेंस लेंगी।"
लेंडिंग ऐप के खिलाफ कार्रवाई
गूगल ने बिना रजिस्ट्रेशन और धोखाधड़ी करने वाले लेंडिंग ऐप पर शिंकजा कसने के लिए पिछले दो साल में, इन डिजिटल लोन ऐप के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं। अगस्त 2022 में गूगल ने भारत में डिजिटल लोन ऑफर करने वाली करीह 2000 ऐप्स को ब्लॉक किया था। साल 2021 में इसने फाइनेंशियल सर्विस ऑफर करने वाले ऐप के लिए 'गूगल प्ले स्टोर' की पॉलिसी में बदलाव किया था और इसके तहत उन पर कई अतिरिक्त शर्तों का पालन करना अनिवार्य किया था।
कोरोना महामारी के दौरान ऐसे डिजिटल लोन देने वाले ऐप की अचानक से बाढ़ आ गई थी। साथ ही इन ऐप्स के जरिए कई धोखाधड़ी के भी मामले सामने आए, जिसने सरकार, आरबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी परेशान किया है। साल 2020 में इन ऐप्स के लोन वसूली के अवैध तरीकों के चलते कई लोगों ने भी आत्महत्या भी कर लिया था, जिसके बाद यह काफी मुद्दा बना था।
नीरो (Niro) के सीईओ आदित्य कुमार ने बताया, “RBI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोन देने वाले ऐप्स को उसके दिशानिर्देशों का पालन करना और उसके तहत काम करना होगा। जो लोन देने के अलावा अन्य सेवाओं की संभावना तलाशना चाहते हैं, उन्हें लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा ताकि उनपर उचित रेगुलेशन हो सके।”
NBFC सेक्टर में कॉम्पिटीशन
वित्त वर्ष 2022 में देश का क्रेडिट मार्केट पिछले साल की तुलना में 11.1 फीसदी बढ़कर 174.3 लाख करोड़ रुपये का रहा था। क्रेडिट ब्यूरो सीआरआईएफ हाई मार्क (CRIF High Mark) ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी थी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि NBFC और दूसरे डिजिटल लेंडर्स का होम लोन, माइक्रोफाइनेंस लोन, क्रेडिट कार्ड्स, बिजनेस और कंज्यूमर लोन्स, टू-व्हीलर लोन और रिटेल लोन जैसे अहम सेगमेंट में दबदबा है। वहीं कर्मशियल लोन पर पारंपरिक बैंकों का कब्जा है।
Aye Finance के स्ट्रैटजी हेड, सोवन सत्यप्रकाश ने बताया कि रिटेल लोन सेगमेंट में पहले से ही काफी भीड़भाड़ है। NBFC सेगमेंट में नई कंपनियों के आने से रिटेल लोन सेगमेंट में और कॉम्पिटीशन बढ़ेगा। उन्होंने कहा, 'नई कंपनियों के आने से योग्य कर्जदारों के ओवरलीवरेजिंग या सबप्राइम लेंडिंग बढ़ाने का भी खतरा है। हालांकि MSEC सेगमेंट को इससे फायदा हो सकता है।