अदाणी ग्रुप (Adani Group) में दिग्गज इनवेस्टमेंट फर्म जीक्यूजी पार्टनर्स (GQG Partners) ने 15446 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया है। इस फर्म के को-फाउंडर राजीव जैन की बात करें तो उनका ट्विटर पर अकाउंट नहीं और वह टीवी पर भी कभी-कभार ही दिखते हैं लेकिन उनकी स्ट्रैटजी शानदार साबित हुई है। ड्राइवरलेस कार और हाइपरसोनिक मिसाइल के जमाने में उनके ग्रोथ स्टॉक फंड्स में तेल, तंबाकू और बैंकिंग सेक्टर की कई कंपनियां हैं। राजीव जैन की यह स्ट्रैटजी कारगर साबित हुई है और सात साल से भी कम समय में उनकी कंपनी 9200 करोड़ डॉलर (7.57 लाख करोड़ रुपये) की बन चुकी है। मार्निंगस्टार डायरेक्ट के मुताबिक इतने कम समय में इतना बड़ा निवेश अगर किसी स्टार्टअप ने जुटाया होगा, तो वह गिनी-चुनी ही होंगी।
बेंचमार्क के दोगुने से भी अधिक रिटर्न
पिछले साल 2020 में जब ढहते बाजार में ज्यादातर एसेट मैनेजर्स के क्लाइंट्स अपने फंड्स से पैसे निकाल रहे थे तो GQG तेजी से ऊपर चढ़ रही थी। इसने 800 करोड़ डॉलर का नया निवेश किया और चार में से तीन फ्लैगशिप फंड्स ने तो बेंचमार्क इंडेक्स को बड़े अंतर से पछाड़ दिया। इसके 2600 करोड़ डॉलर के सबसे बड़े फंड Goldman Sachs GQG Partners International Opportunities Fund ने तो जबरदस्त रिटर्न दिया है। दिसंबर 2016 में यह शुरू हुआ था और तब से अब तक 10.8 फीसदी सालाना रिटर्न दिया जो बेंचमार्क के 3.9 फीसदी के सालाना रिटर्न के दोगुने से भी अधिक है।
खुद को मानते हैं क्वालिटी ग्रोथ मैनेजर
जीक्यूजी शुरू करने से पहले राजीव जैन Vontobel Asset Management में चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर रह चुके हैं। इसने राजीव को आगे के लिए काफी हद तक तैयार किया। वह इंडिविजुअल स्टॉक्स पर ढेर सारे पैसे लगाते हैं और पूरी पोजिशन से बाहर भी हो सकते हैं, यह एक ऐसा कदम है जो इंडस्ट्री में ज्यादातर लोग अवाइड करना चाहते हैं। वह खुद का क्वालिटी ग्रोथ मैनेजर मानते हैं। ब्लूमबर्ग के साथ एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वोलेटाइल के समय आप क्वॉलिटी स्टॉक्स की और आसानी से पहचान कर सकते हैं।
कुछ फैसले गलत भी साबित हुए
ऐसा नहीं है कि राजीव के सारे फैसले सही ही साबित हुए हों। उन्होंने पिछले साल की शुरुआत में एमर्जिंग-मार्केट फंड का 16 फीसदी पैसा रूस में लगा दिया और रूस-यूक्रेन की लड़ाई में यह फैसला बैकफायर कर गया। उन्होंने पैसे निकालने शुरू किए लेकिन पूरा नहीं निकाल सके और इसके चलते पिछले साल इस फंड का 21 फीसदी पैसा डूब गया। जीक्यूजी का सिर्फ यही फंड बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर साबित हुआ।
इसके अलावा अमेरिकी टेक कंपनियों के स्टॉक्स में इस साल शानदार तेजी दिख रही है तो इसका फायदा उठाने से जीक्यूजी फंड्स चूक गई। ऐसा इसलिए क्योंकि इसने टेक शेयरों पर दांव नहीं लगाया है। इसके अलावा जीक्यूजी फंड ने चीन को अंडरवेट करने का फैसला किया, यह भी महंगा साबित हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन में कोविड की सख्त पॉलिसी वापस ली जा चुकी है और इसके चलते इकॉनमी बढ़ रही है। जीक्यूजी का इंटरनेशनल फंड इस साल महज 3.4 फीसदी चढ़ा है जबकि बेंचमार्क में 7.8 फीसदी की तेजी आई है।
अधिक रिस्क उठाना नहीं पसंद
राजीव जैन की एक खास बात ये है कि वह अधिक रिस्क वाले स्टॉक्स में पैसे नहीं लगाते हैं। मॉर्निंगस्टार के एक सीनियर एनालिस्ट ग्रे वोल्पर के मुताबिक बाकी ग्रोथ मैनेजर्स की तुलना में अधिक सावधान रहते हैं। हालांकि यहां एक विरोधाभास भी है कि राजीव सुरक्षित और डिफेंसिव स्टॉक्स पसंद करते हैं लेकिन फिर उसमें रिस्की बेट्स लगा देते हैं यानी कि भारी निवेश कर देते हैं।
हालांकि उनका यह भी कहना है कि ऐसा करने से पहले वे कंपनियों की बैलेंस शीट की मजबूती चेक करते हैं जैसे कि Exxon Mobil Corp. और Visa Inc. के एकाएक डूब जाने का रिस्क नहीं है। राजीव की स्ट्रैटजी ये है कि वह जिस कारोबार में पैसे लगाते हैं, उसे ढेर सारे कैश जेनेरेट होते हैं यानी कि पैसे डूबने का खतरा बहुत कम रहता है। उन्होंने इंटरनेशनल फंड में बेंचमार्क की 2 हजार से अधिक कंपनियों में से 40-50 लॉर्ज कैप स्टॉक्स में और यूएस फंड में एसएंडपी इंडेक्स के 500 से अधिक कंपनियों में से 30 से कम स्टॉक्स में पैसे लगाए हैं।
राजीव जैन के बारे में पर्सनल डिटेल्स
जीक्यूजी के को-फाउंडर राजीव जैन भारत में पैदा हुए और यहीं पले-बढ़े। इसके बाद 1990 में मियामी यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए। उन्होंने 1994 में Vontobel जॉइन किया और फिर 2002 में इस स्विस कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी बन गए। मार्च 2016 में उन्होंने अपनी कंपनी जीक्यूजी शुरू करने के लिए वोंटोबेल को छोड़ दिया। उनके पास जीक्यूजी की मेजॉरिटी हिस्सेदारी है और अपना अधिकतर पैसा वे इसी के फंड्स में लगाते हैं।
वह उन कंपनियों के एग्जेक्यूटिव्स से नहीं मिलते हैं, जिसमें निवेश करने पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा कंपनी के एंप्लॉयीज को अपने पर्सनल खाते से स्टॉक्स की ट्रेडिंग पर उन्होंने बैन लगाया हुआ है। अपनी गलतियों को वह स्वीकार भी करते हैं जैसे कि रूस में निवेश डूबने पर उन्होंने सभी एंप्लॉयीज से माफी मांगी थी। टेक स्टॉक्स पर वह दांव नहीं लगा रहे हैं लेकिन उनका यह भी कहना है कि अगर उनका डेटा गलत साबित होता है तो वह अपना मूड बदलने को तैयार हैं।