वेदांता (Vedanta) की सब्सिडियरी कंपनी हिंदुस्तान जिंक (Hindustan Zinc) का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने की तैयारी चल रही है। हिंदुस्तान जिंक के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्र को उम्मीद है कि प्रस्तावित ऑफर फॉर सेल चालू वित्त वर्ष 2022-23 के आखिरी तक पूरा हो जाएगा। सीएनबीसी-टीवी 18 के साथ चर्चा में उन्होंने कहा कि इसे लेकर सरकार से मिलकर काफी चर्चा हो चुकी है। इस ओएफएस में वेदांता भी हिस्सा लेगी या नहीं, इसे लेकर उनका कहना है कि यह इस पर निर्भर करता है कि कितनी हिस्सेदारी ओएफएस के तहत बिक्री के लिए रखी जाएगी। इसके अलावा नियमों के तहत वेदांता के तहत कितनी राशि इसमें लगा सकती है। वेदांता की हिंदुस्तान जिंक में फिलहाल 64.92 फीसदी हिस्सेदारी है।
एक डील के विरोध में सरकार की मंजूरी के इंतजार में कंपनी
वेदांता के विदेशों के जिंक एसेट्स का हिंदुस्तान जिंक अधिग्रहण करना चाहती है, जिसे लेकर सरकार सहमत नहीं हो रही है। हिंदुस्तान जिंक इस डील को 300 करोड़ डॉलर के वैल्यूएशन पर करने की कोशिश में है। इस डील के तहत वेदांता को THL Zinc, Mauritius, जिसके एसेट्स नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका में हैं, की बिक्री के लिए 240 करोड़ डॉलर का तत्काल कैश मिलता। बाकी 58 करोड़ डॉलर का पेमेंट बाद में होता।
सरकार के इस विरोध को लेकर अरुण मिश्र का कहना है कि कंपनी कॉरपोरेट गवर्नेंस की सीमा में रहकर काम करती है और सौदे को लेकर बोर्ड के किसी भी फैसले पर माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी होगी। हिंदुस्तान जिंक में सरकार की 29 फीसदी हिस्सेदारी है और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर है। हिंदुस्तान जिंक के सीईओ का कहना है कि वह सरकार समेत सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर रहे हैं और अपनी स्ट्रैटजी को लेकर सहमत करने की कोशिश में हैं।
अगर सौदा नहीं होता है तो क्या होगा
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ का कहना है कि कंपनी को अब देश से बाहर बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए जरूरी है कि यह देश के बाहर एसेट्स हासिल कर सके। उनका कहना है कि कंपनी के पास शेयरधारकों की बैठक बुलाने के लिए तीन महीने का समय है जिसमें मंजूरी ली जाएगी। हालांकि उनका यह भी कहना है कि अगर सौदा आगे नहीं बढ़ पाता है तो अंतिम कदम सरकार को ही उठाना होगा। अरुण का कहना है कि उनका काम सरकार और बाकी माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के साथ मिलकर काम करना है और वह ऐसा करते रहेंगे।