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₹2160 करोड़ का ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर: Maruti Suzuki को 2-5 साल तक लड़नी पड़ सकती है लड़ाई

जब आयकर विभाग का असेसिंग ऑफिसर, असेसी द्वारा फाइल किए गए रिटर्न में मौजूद इनकम या लॉस में कोई गड़बड़ी पाता है, तो वह असेसी यानी रिटर्न फाइल करने वाली यूनिट की आपत्ति या मंजूरी हासिल करने के लिए ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर का प्रस्ताव करता है। Maruti Suzuki ने भरोसा दिलाया है कि इस आदेश का उसके फाइनेंस, ऑपरेशंस या अन्य गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Oct 05, 2023 पर 11:35 AM
₹2160 करोड़ का ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर: Maruti Suzuki को 2-5 साल तक लड़नी पड़ सकती है लड़ाई
Maruti Suzuki का इरादा DRP के समक्ष आपत्तियां दाखिल करने का है।

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) को हाल ही में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से 2,159.70 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर मिला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस ऑर्डर के खिलाफ कंपनी को दो से पांच साल तक मुकदमा लड़ना पड़ सकता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि अगर डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन पैनल (DRP) मारुति सुजुकी के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो इस मुद्दे को पहले भी हल किया जा सकता है। मारुति सुजुकी इंडिया ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा था कि यह ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर वित्त वर्ष 2019-20 के लिए है, जहां इनकम टैक्स रिटर्न में बताई इनकम के मुकाबले 2159.70 करोड़ का अंतर बताया गया है।

जब आयकर विभाग का असेसिंग ऑफिसर, असेसी द्वारा फाइल किए गए रिटर्न में मौजूद इनकम या लॉस में कोई गड़बड़ी पाता है, तो वह असेसी यानी रिटर्न फाइल करने वाली यूनिट की आपत्ति या मंजूरी हासिल करने के लिए ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर का प्रस्ताव करता है। करदाता या तो असेसिंग ऑफिसर के समक्ष दावे का विरोध दर्ज कर सकता है या फिर DRP को अपील कर सकता है। अगर करदाता DRP का दरवाजा खटखटाता है तो उसे 9 माह में फैसला देना होता है। कंपनी का इरादा DRP के समक्ष आपत्तियां दाखिल करने का है। मारुति ने भरोसा दिलाया है कि इस आदेश का उसके फाइनेंस, ऑपरेशंस या अन्य गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बीटीजी लीगल के पार्टनर अमित जैन का कहना है कि इस पैनल से राहत की उम्मीदें अधिक नहीं हैं। इस तरह के हाई-वैल्यू एडजस्टमेंट्स केवल टैक्स ट्रिब्यूनल या हाई कोर्ट लेवल पर ही अंतिम अंजाम तक पहुंच सकते हैं और इसमें कम से कम दो से पांच साल लग सकते हैं। अगर मामले को मारुति सुजुकी या कर अधिकारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है, तो इसमें तीन से चार साल और लग सकते हैं।

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