फार्मईजी (PharmaEasy) की पैरेंट कंपनी एपीआई होल्डिंग्स (API Holdings) राइट इश्यू लेकर आ रही है। राइट इश्यू के तहत मौजूदा शेयरधारकों को एक खास भाव पर शेयर ऑफर किए जाते हैं। अब कंपनी इस बात का प्रबंध कर रही है कि अगर राइट इश्यू में सभी शेयरहोल्डर्स हिस्सा नहीं लेते हैं तो इसकी भरपाई कैसे हो। इसके लिए एपीआई होल्डिंग्स की योजना मनिपाल ग्रुप को शेयर करने की है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। मनीकंट्रोल को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मनिपाल ग्रुप ने इस ऑनलाइन फार्मेसी में 1300 करोड़ रुपये के निवेश के लिए बाइंडिंग ऑफर पहले ही कर लिया है।
हालांकि एपीआई होल्डिंग्स का बोर्ड इस ऑफर को तभी मंजूरी देगा, जब राइट इश्यू पूरी तरह से न भरे और जितना हिस्सा बचा रहेगा, उसी की भरपाई के लिए भर ही इस ऑफर की मंजूरी दी जाएगी। ऑनलाइन फार्मेसी की योजना कर्ज चुकाने के लिए 3 हजार करोड़ रुपये तक जुटाने की है।
API Holdings ने क्यों लिया यह फैसला
राइट इश्यू के पूरा नहीं भरने की स्थिति में जो बाकी हिस्सा होगा, एपीआई होल्डिंग्स ने उसकी भरपाई मनिपाल से करने की योजना बनाई है। इसकी वजह ये है कि सोमवार 17 जुलाई को मैनेजमेंट के साथ बैठक में शेयरहोल्डर्स ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि मनिपाल ग्रुप को कम वैल्यूएशन पर शेयरों की बिक्री करने की योजना है। एपीआई होल्डिंग्स का वैल्यूएशन पोस्ट-मनी यानी पैसे मिलने के बाद 6000-7000 करोड़ रुपये (73 करोड़-85.3 करोड़ डॉलर) के करीब होने की है जो पिछली बार जुटाए गए फंड के समय 280 करोड़ डॉलर के वैल्यूशन से बहुत कम है।
2021 में इसका वैल्यूएशन 560 करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था। हालांकि उसके बाद से डिजिटल कॉमर्स स्पेस में ओवरऑल वैल्यूएशन में गिरावट के साथ-साथ विंटर फंडिंग और एपीआई की वित्तीय परेशानियों ने इसके शेयरों के भाव नीचे आ गए।
पैसे जुटाने की क्यों पड़ी जरूरत
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का कर्ज चुकाने के लिए कंपनी को तत्काल 2,500 करोड़ रुपये के नकदी की जरूरत है। कंपनी ने इस कर्ज के लिए थायरोकेयर (Thyrocare) के शेयरों को गिरवी रखा है। अब अगर कर्ज से जुड़े कांट्रैक्ट का उल्लंघन होता है तो गोल्डमैन गिरवी रखे गए शेयरों को वापस ले सकता है तो ऐसे में कंपनी के पास सीमित ही विकल्प बचे हैं। कंपनी के शेयरहोल्डर्स की बात करें तो प्रोसुस वेंचर्स, टेमासेक, टीपीजी ग्रोथ और सीडीपीक्यू की कुल मिलाकर इसमें करीब 35 फीसदी हिस्सेदारी है।
अब कंपनी फंड जुटाने के लिए जो कोशिशें कर रही है, उसके बाद प्रमोटर्स की होल्डिंग करीब 4.5-5 फीसदी गिरकर 10 फीसदी के करीब आ जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस डील के तहत फाउंडर्स को प्रदर्शन के आधार पर एंप्लॉयी स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) के जरिए इंसेंटिव दिया जाएगा।