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GIFT City ग्रोथ के अगले चरण में, पीएम मोदी के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट की ये है बड़ी-बड़ी योजनाएं

देश का सबसे नया फाइनेंशियल हब और पीएम मोदी का नया फ्लैगशिप प्रोजेक्ट GIFT City अब ग्रोथ के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक (GIFT) सिटी का पहला चरण करीब तीन साल पहले वर्ष 2020 में तब शुरू हुआ था, जब एक नया रेगुलेटर इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विसेज अथॉरिटी (IFSA) को बनाया गया था। IFSCA के चेयरमैन के राजारमन ने इसके सफर, ग्रोथ की योजनाओं और चुनौतियों के बारे में चर्चा की

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Nov 30, 2023 पर 1:17 PM
GIFT City ग्रोथ के अगले चरण में, पीएम मोदी के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट की ये है बड़ी-बड़ी योजनाएं
गिफ्ट सिटी की शुरुआत वर्ष 2007 में पूरी तरह से ग्रीनफील्ड एक्सपेरिमेंट के रूप में हुई थी जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

देश का सबसे नया फाइनेंशियल हब और पीएम मोदी का नया फ्लैगशिप प्रोजेक्ट GIFT City अब ग्रोथ के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक (GIFT) सिटी का पहला चरण करीब तीन साल पहले वर्ष 2020 में तब शुरू हुआ था, जब एक नया रेगुलेटर इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विसेज अथॉरिटी (IFSA) को बनाया गया था। इसका लक्ष्य भारत से जुड़ी ट्रेडिंग दुबई, मॉरीशस या सिंगापुर की बजाय देश से करने का है। इसे लेकर IFSCA के चेयरमैन के राजारमन (K Rajaraman) ने ब्लूमबर्ग न्यूज से बातचीत में इसके सफर, ग्रोथ की योजनाओं और चुनौतियों के बारे में चर्चा की जिसके बारे में नीचे दिया जा रहा है। राजारमन को अगस्त मे इसकी कमान सौंपी गई थी।

कैसा रहा GIFT IFSCA का अब तक का सफर

गिफ्ट सिटी की शुरुआत वर्ष 2007 में पूरी तरह से ग्रीनफील्ड एक्सपेरिमेंट के रूप में हुई थी जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 2020 में सरकार ने IFSCA को एक यूनिफाईड रेगुलेटर के रूप में बनाया। इसने अब तक एयरक्राफ्ट लीजिंग, शिप लीजिंग समेत कई इंडस्ट्रीज के लिए 30 से अधिक नियम जारी किए हैं। फाइनेंशियल डोमेन में बात करें तो अब इसके दायरे में बैंक, फंड्स, कैपिटल मार्केट्स और इंश्योरेंस हैं। सितंबर 2020 में यहां सिर्फ 129 ही रजिस्टर्ड एंटिटीज थीं जो अब सितंबर 2023 में बढ़कर 550 पर पहुंच गई हैं। इस दौरान बैंकों की संख्या 13 से बढ़कर 25 हो गई। यहां दो इंटरनेशनल स्टॉक एक्सचेंज हैं जिन पर इंडेक्स, स्टॉक, करेंसी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स समेत कई प्रोडक्ट कैटेगरीज में 20 से अधिक घंटे तक ट्रेडिंग होती है।

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