बेंगलुरु की फिनटेक स्लाइस (Slice) की एसएफबी (स्मॉल फाइनेंस बैंक) नॉर्थ-ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक (North East Small Finance Bank) की कमान अब सतीश कुमार कालरा संभालेंगे। नॉर्थ ईस्ट एसएफबी (स्मॉल फाइनेंस बैंक) ने सतीश कुमार कालरा के नाम का अंतरिम एमडी और सीईओ के तौर पर ऐलान किया है। उनके नाम को एसएफबी के बोर्ड और केंद्रीय बैंक RBI से भी मंजूरी मिल चुकी है। सतीश के पास 40 साल से अधिक का बैंकिंग अनुभव है और इससे पहले वह आंध्रा बैंक के एमडी और सीईओ (CMD) थे। उन्हें क्रेडिट, ट्रेजरी और रिस्क मैनेजमेंट फील्ड में महारत हासिल है। आंध्रा बैंक में रहते हुए उन्होंने क्रेडिट में 13% की सालाना चक्रवृद्धि दर की ग्रोथ (CAGR) हासिल की और 1200 से अधिक नई शाखाएं शुरू कीं।
Slice और North East Small Finance Bank के बारे में
कुछ महीने पहले अक्टूबर की शुरुआत में स्लाइस और गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आपस में विलय का ऐलान किया था। इसके चलते पहली बार कोई फिनटेक स्मॉल फाइनेंस बैंक बनने वाला है। अधिकतर फिनटेक का कारोबारी मॉडल लेंडिंग पर आधारित है और यहां फंड की लागत अहम हो जाती है। हालांकि अब SFB बनने के बाद रेगुलेटेड एंटिटी के रूप में स्लाइस पैसों को डिपॉजिट भी कर सकता है यानी कि अधिकतर बाकी फिनटेक और एनबीएफसी की तुलना में इसे क्रेडिट के लिए बेहतर दरों पर पैसे जुटाने में आसानी होगी।
पहले स्लाइस अपने युवा ग्राहकों को कम क्रेडिट लिमिट के साथ प्रीपेड कार्ड जारी करता था और फिर धीरे-धीरे क्रेडिट सीमा बढ़ाता था। हालांकि RBI ने पिछले साल कंपनी को प्रीपेड कार्ड पर क्रेडिट लाइन जारी करने से रोक दिया था। इस आदेश ने कार्ड जारी करने वाले यूनी, ज्यूपिटर, फाई नियोबैंक जैसे कई स्टार्टअप्स के कारोबार को खत्म कर दिया है। वहीं नॉर्थ ईस्ट की पश्चिम बंगाल के साथ-साथ सात पूर्वोत्तर राज्यों में 208 शाखाएं हैं। इसका फोकस बड़े पैमाने पर गांवों और निचले तबके के ग्राहकों पर है।
Andhra Bank के पूर्व सीएमडी का क्या होगा काम
आंध्रा बैंक के पूर्व सीएमडी सतीश के पास बैंकिंग का अच्छा-खासा अनुभव है। उनके अनुभव से स्लाइस नॉर्थ ईस्ट एसएफबी को पहली बार डिजिटल बैंकिंग अपनाने वालों के साथ-साथ पहली बार कर्ज लेने वालों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। वह स्लाइस और नॉर्थ ईस्ट स्मॉल फाइनेंस बैंक के बीच चल रही विलय प्रक्रिया को संभालेंगे और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि दोनों एंटिटीज बेहतर तरीके से मिल सकें।