Shark Tank India की जज नमिता थापर ने कहा, 'मैंने अपने जिंदगी से नेगेटिव लोगों को निकालने की कोशिश की'

Shark Tank India की जज नमिता थापर का मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए एक अनुशासित खान-पान और उचित नींद लेना जरूरी है

अपडेटेड Oct 11, 2022 पर 6:39 PM
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Shark Tank India की जज नमिता थापर ने बताया कि वह पहले एक ईमोशनल ईटर थीं

एमक्योर फार्मास्युटिकल्स (Emcure Pharmaceuticals) की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और लोकप्रिय रियल्टी शो- शार्क टैंक इंडिया की जज नमिता थापर (Namita Thapar) ने हाल ही में रिलीज हुई अपनी पहली किताब 'द डॉल्फिन एंड द शार्क' में साफ तौर से स्वीकार किया कि वह एक इमोशनल ईटर थीं। जब लोग गुस्से में या तनाव में बिना सोचे समझे ढ़र सारा खाना खाते लगते हैं, तो उन्हें ईमोशनल ईटर कहते हैं। हालांकि, हाल के सालों में 45 वर्षीय थापर ने अपनी सेहत और फिटनेस को प्राथमिकता दी है। मनीकंट्रोल के लिए दीपली सिंह ने इस मुद्दे पर नमिता थापर के साथ बातचीत की, पेश हैं संपादित अंश:

आपको कब एहसास हुआ कि फिट और स्वस्थ रहना जीवन का एक अहम हिस्सा है?

मैं एक ईमोशनल ईटर हुआ करती थीं। इसलिए जब मुझे तनाव अधिक तनाव होता था, तो मेरा वजन बढ़ जाता था। जैसे कि मेरी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा, चार्टर्ड अकाउंटेंट की अंतिम परीक्षा, अपने एमबीए के दौरान अकेले अमेरिका में रहना, और निश्चित रूप से मेरी दो प्रेग्नेंसी के दौरान। करीब 10 साल पहले, मैंने सेहत और फिटनेस को प्राथमिकता देने का फैसला किया और तब से, मैं एक अनुशासित जीवन जी रही हूं। मैं सप्ताह में छह दिन एक्सरसाइज करती हूं। हेल्दी फूड खाती हूं और नींद और सेल्फ-केयर को भी प्राथमिकता देती हूं।

आपके हफ्ते भर का वर्कआउट रूटीन क्या है?


मैं हफ्ते में 6 दिन वर्कआउट करती हूं। मैं फिट रहने के लिए डांस एरोबिक्स, फंक्शनल ट्रेनिंग, योगा और इवनिंग वॉक का कॉम्बिनेशन करती हूं। मैं अपनी डाइट को लेकर बहुत सजग हूं। मैं अधिकतर घर का बना सादा भारतीय खाना खातीं हूं। ग्लटन-मुक्त शाकाहारी खाने लेती हूं और हर रात 8 बजे से पहले खाना खा लेती हूं। सात-आठ घंटे की नींद भी जरूरी है।

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रोज अपने रूटीन को पालन करने में सबसे अधिक कौन सी परेशानी आती है और आप इसे कैसे संभालती हैं?

जब मैं सफर में होती हूं, तब मेरे लिए अपने रूटीन को पालन करना कठिन हो जाता है। यह मेरे खाने, नींद और एक्सरसाइज सभी को प्रभावित करता है। मैंने इन दिनों सफर के दौरान भी अपने ट्रेनर्स के साथ जूम सेशन करना शुरू कर दिया है।

आपने लॉकडाउन के दौरान खुद को कैसे फिट रखा?

खूब देर तक चलना - यही इकलौता विकल्प था।

क्या आपको लगता है कि फिट रहने से आपको ऑफिस में बेहतर लीडर बनने में मदद मिली है?

जब आप फिट होते हैं, तो आपके पास एक बेहतर इम्यून सिस्टम होता है। आप स्वस्थ होते हैं और यह आपके दिमाग को एकाग्र और काम पर बनाए रखता है। यह आपके एनर्जी लेवल को भी जबरदस्त रूप से बढ़ाता है और आप प्रतिदिन बहुत कुछ कर सकते हैं।

क्या आपके पास अपने लिए कोई फिटनेस गोल या कोई चुनौती तय की हुई है?

मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी उतना ही जरूरी है और मेरे लिए मेडिटेशन का अर्थ है वर्तमान में जीना, न कि अतीत और भविष्य में। मैं पूरी तरह पॉजिटिविटी के साथ जीना चाहती हं। यही वह लक्ष्य और चुनौती है जिसे मैंने अपने लिए तय किया है। के साथ जीने के लिए। यह कहीं से भी आसान नहीं है!

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आपकी लीडरशिप स्टाइल कैसी है?

मेरी लीडरशिप स्टाइल मेरी किताब के शीर्षक की तरह है - द डॉल्फिन एंड द शार्क। मैं सहानुभूति और आक्रामकता के बीच संतुलन बनाने की पूरी कोशिश करता हूं। मैं तीन मंत्रों में विश्वास करता हूं - जितना कम उतना अच्छा, अपने से ज्यादा होशियार लोगों को हायर करें और प्लान को लागू करने पर गंभीरता पर ध्यान दें। मैं साहस, क्षमता और करुणा के सिद्धांतों का पालन करने की कोशिश करती हूं।

आप वर्क लाइफ बैलेंस को कितना अहमियत देती हैं?

मैंने अक्सर कहा है कि लोग बहुत ही गर्व के साथ ये बात बताते हैं कि "मैं ऑफिस में दर तक काम करता हूं, मैं बहुत सफर करता हूं" आदि। यह सरासर मूर्खता है। एक हेल्दी जीवन के लिए निजी जीवन और प्रोफेशनल लाइफ में संतुलन बेहद अहम है।

आखिर में, आप कैसे तनावमुक्त रहती हैं और अपने मेंटल हेल्थ की देखभाल कैसे करते हैं?

खुश रहना और पॉजिटिव सोच रखना जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका है। मैं आराम के समय में फिल्में देखती हूं। मैं खुद का ख्याल रखने के लिए भी समय निकालती हूं। सबसे अहम बात, मैंने अपने जीवन से नेगिटिव सोच रखने वाले लोगों को निकालने और अपना दायरे छोटा रखने की कोशिश की है, जिसमें सच्चे और आपको समझने वाले लोग हैं।

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