upGrad के मुंबई ऑफिस पहुंचे GST के अधिकारी, ये है पूरा मामला

ऑनलाइन मास्टर्स और पीएचडी कराने वाली upGrad के मुंबई ऑफिस पर 19 जुलाई को एकाएक जीएसटी के अधिकारी पहुंच गए। पिछले कुछ महीने में यह दूसरी बार है जब सरकारी अधिकारियों ने किसी स्टार्टअप को अपनी जांच के दायरे में लिया है। इससे पहले देश की सबसे अधिक वैल्यू वाली स्टार्टअप बायजूज (Byju's) को भी जांच का सामना करना पड़ा था

अपडेटेड Jul 20, 2023 पर 8:24 AM
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upGrad को रोनी स्क्रूवाला, मयंक कुमार और फाल्गुन कोमपल्ली ने इसे 2015 में शुरू किया था।

ऑनलाइन मास्टर्स और पीएचडी कराने वाली upGrad के मुंबई ऑफिस पर 19 जुलाई को एकाएक जीएसटी के अधिकारी पहुंच गए। हालांकि एडुटेक यूनिकॉर्न ने इसे GST अधिकारियों का रूटीन सर्वे बताया है। upGrad के लीगल हेड कोएल हेमदेव का कहना है कि यह एक रूटीन सर्वे है और इसमें जीएसटी अधिकारियों का पूरा सहयोग किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने बाकी डिटेल्स का खुलासा नहीं किया है। पिछले कुछ महीने में यह दूसरी बार है जब सरकारी अधिकारियों ने किसी स्टार्टअप को अपनी जांच के दायरे में लिया है। इससे पहले देश की सबसे अधिक वैल्यू वाली स्टार्टअप बायजूज (Byju's) को भी जांच का सामना करना पड़ा था।

Byju's को दो बार करना पड़ा जांच का सामना

कुछ महीने पहले अप्रैल में बायजूज के तीन ऑफिसों में केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने पहुंचकर कार्रवाई की थी। इसके बाद फिर पिछले महीने जून में बायजूज मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) के रडार पर आ गई। ईडी ने बायजूज के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े नियमों के उल्लंघन मामले में कार्रवाई की थी। वहीं दूसरी तरफ डेडलाइन के बाद भी रिजल्ट्स में देरी के चलते यह मिनिस्ट्री के रडार पर आ गई। बायजूज ने 2021 और 2022 का ऑडिटेड अर्निंग्स दाखिल नहीं किया था।


वहीं ईडी की बात करें तो इसने कहा था कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से अपना फाइनेंशियल स्टेटमेंट नहीं तैयार किया है और अकाउंट भी ऑडिट नहीं कराया है जो अनिवार्य है तो ऐसे में कंपनी ने जो आंकड़े दिए हैं, उसे बैंक के साथ मिलाया जा रहा है।

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upGrad की क्या है स्थिति

इस एडुटेक यूनिकॉर्न के ऑफिस पर जीएसटी अधिकारी क्यों पहुंचे, इसके बारे में अभी पूरी डिटेल्स नहीं मिल पाई है। हालांकि अगर कंपनी के सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2022 में इसका घाटा बढ़कर 626 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसका घाटा इतना इसलिए बढ़ गया क्योंकि एंप्लॉयी बेनेफिट कॉस्ट्स बढ़कर 400 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि इसका कंसालिडेटेड रेवेन्यू दोगुने से अधिक बढ़कर 682.21 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

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पिछले साल अगस्त में मनीकंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में इसके को-फाउंडर मयंक कुमार ने कहा था कि अगर यह आगे कोई और अधिग्रहण नहीं करती है तो वह मुनाफे की स्थिति में आ जाएगी। यह 2021 से ही अधिग्रहण किए जा रही है और इसने 11 से अधिक स्टार्टअप का अधिग्रहण किया है। पिछले साल इसने कुछ निवेशकों से 21 करोड़ डॉलर जुटाए और इसका वैल्यूएशन करीब 225 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। इसके अलावा इस साल इसे टेमासेक, रूनी स्क्रूवाला समेत कुछ और मौजूदा निवेशकों से 300 करोड़ रुपये का निवेश मिला। रोनी स्क्रूवाला, मयंक कुमार और फाल्गुन कोमपल्ली ने इसे 2015 में शुरू किया था।

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