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स्टार्टअप को नहीं होगी फंड की किल्लत, Softbank फिर मैदान में, कम से कम इतना मिलेगा निवेश

पिछले 18 महीने से फंडिंग का सूखा अब खत्म हो सकता है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी-भरकम निवेश डालने वाला सॉफ्टबैंक अब एक बार फिर से भारतीय स्टार्टअप में निवेश को तैयार है। जापानीज निवेशक आने वाले महीने में एक बार फिर से डील साइन करना शुरू करेगा। यह जानकारी मनीकंट्रोल के साथ इंटरव्यू में सॉफ्टबैंक इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के प्रमुख (भारत, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका) सुमेर जुनेजा ने दी

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 11, 2024 पर 2:53 PM
स्टार्टअप को नहीं होगी फंड की किल्लत, Softbank फिर मैदान में, कम से कम इतना मिलेगा निवेश
सॉफ्टबैंक इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स ने नवंबर 2018 से अपना ऑपरेशन शुरू किया था और उसके बाद से इसने भारतीय स्टार्टअप में करीब 1100 करोड़ रुपये डाले हैं।

पिछले 18 महीने से फंडिंग का सूखा अब खत्म हो सकता है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी-भरकम निवेश डालने वाला सॉफ्टबैंक (SoftBank) अब एक बार फिर से भारतीय स्टार्टअप में निवेश को तैयार है। जापानीज निवेशक आने वाले महीने में एक बार फिर से डील साइन करना शुरू करेगा। यह जानकारी मनीकंट्रोल के साथ इंटरव्यू में सॉफ्टबैंक इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के प्रमुख (भारत, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका) सुमेर जुनेजा ने दी। सुमेर ने यह टिप्पणी ऐेसे समय में की है जब अधिकतर निवेशकों ने जिन कंपनियों में पैसे डाले हैं, उसे लेकर अधिक सोच-विचार करने लगे हैं। टाइगर ग्लोबल, प्रोसुस और अल्फा जैसे लेट-स्टेज इनवेस्टर भी निवेश से कतरा रहे हैं। सॉफ्टबैंक भी इसी वेट एंड वॉच मोड में रहा है लेकिन अब यह नए दौर की कंपनियों में निवेश और भारत में अपना पोर्टफोलियो तैयार करने की योजना बना रहा है।

'पिछले दो वर्षों से अलग होगा यह साल 2024'

वर्ष 2022 और वर्ष 2023 की शुरुआत में सभी निवेशक, खासतौर से शुरुआती स्टेज के निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो पर ध्यान देना शुरू किया कि फंडिंग विंटर में भी यह मजबूत बना रहे। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनका पोर्टफोलियो भारी-भरकम था। इसके चलते सौदों की संख्या में गिरावट आई। हालांकि 2023 की दूसरी छमाही में स्थिति बदली और सीड और सीरीज ए/बी डील्स ने स्पीड पकड़ी। सुमेर जुमेजा के मुताबिक अब इस साल स्थिति बदलने वाली है क्योंकि फाउंडर्स अब नए वैल्यूशन के साथ आ रहे हैं और बाजार की संभावनाओं को भुनाने के लिए वे फिर से इसकी वैल्यू तय करने को भी तैयार हैं। सुमेर के मुताबिक फाउंडर्स ने लागत कम करने के लिए में काफी उपाय किए हैं जिसने माहौल बेहतर किया है।

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